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परिसीमन कर जम्मू-कश्मीर, लदृाख में 8 विधानसभा सीटें बढ़ाने की तैयारी में केंद्र सरकार

गुंजन कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 21 Jun 2019 05:30 AM IST
Central Government preparation of extension of 8 assembly seats in Jammu and Kashmir, Ladakh
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सरकार जम्मू-कश्मीर की परिसीमन की योजना के तहत जम्मू और लद्दाख क्षेत्र मिलाकर विधानसभा की आठ नई सीटें जोडने पर विचार कर रही है। योजना सफल रही तो जम्मू और लद्दाख विधानसभा सीटें मिलाकर कश्मीर विधानसभा से तीन सीटें अधिक हो जाएंगी। फिलहाल राज्य के कश्मीर क्षेत्र में 46, जम्मू में 37 और लद्दाख क्षेत्र में 4 विधानसभा सीटें हैं। 
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उच्चपदस्थ सरकारी सूत्रों के मुताबिक इसे अमली जामा पहनाने  के लिए राज्यपाल स्तर पर सभी तकनीकी अड़चने दूर करने का काम चल रहा है। सरकार का मानना है कि सीटों के मौजूदा व्यवस्था में राज्य विधान सभा में 96 फीसदी मुस्लिम जनसंख्या वाले कश्मीर का बर्चस्व रहता है।

लिहाजा हिंदु और अनुसूचित जनजाति बहुल जम्मू और लद्दाख का प्रतिनिधित्व संतुलित नहीं है। क्षेत्रफल के लिहाज से कश्मीर पूरे राज्य का 15.8 फीसदी है जबकि जनसंख्या 54.9 फीसदी है। जम्मू पूरे राज्य के 25.9 फीसदी इलाके में फैला है और जनसंख्या 42.9 फीसदी है। लद्दाख के पास सबसे अधिक 58.3 फीसदी इलाका है जबकि जनसंख्या 2.2 फीसदी है। कश्मीर क्षेत्र में प्रत्येक विधानसभा सीट पर वोटरों की संख्या जम्मू क्षेत्र से बहुत  कम है। 

सबसे बड़ी कानूनी अड़चन

सूत्रों के मुताबिक सरकार के सामने सबसे बड़ी अड़चन है कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अबदुल्ला  ने 2002 में राज्य के संविधान में आनन फानन में एक संशोधन किया था। इसके चलते 2026 तक राज्य का परिसीमन नहीं किया जा सकता।

इसी वजह से 2008 में देश भर में हुए परिसीमन से जम्मू-कश्मीर अछूता रहा। सरकार इसकी काट केलिए विधि विशेषज्ञों से राय ले रही है। राज्य में आखिरी परिसीमन 1992-93 में हुआ था जिसमें आतंकवाद के चलते पलायन किए गए हिंदुओं की वजह से बने नए समीकरणों को शामिल नहीं किया जा सका था।  

राज्य में 11 फीसदी अनुसूचित जनजाति

दूसरी तरफ राज्य में 11 फीसदी जनजाति हैं जिनमें बकरवाल,  गुजर और गडेडिय़ा शामिल हैं। केंद्र ने 1991 में इन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा दे दिया था। लेकिन इनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व नगण्य है। जबकि देश केबाकी हिस्से में अनुसूचित जनजातियों केलिए सीटें आरक्षित होती हैं।

एक मुद्दा यह भी है कि बंटवारे के बाद राज्य में बसे पश्चिम पाकिस्तान से आए लोगों को वोट का अधिकार नहीं दिया गया है। जबकि देश के दूसरे हिस्सों में बसे ऐसे लोगों को यह अधिकार प्राप्त है। हालांकि जम्मू-कश्मीर में इनकी नागरिका पर भी लंबे समय से  विवाद चल रहा है।

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