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CJI: 'मेंशनिंग का काम वरिष्ठ वकीलों का नहीं', सीजेआई रमण ने कपिल सिब्बल व अभिषेक सिंघवी को भी रोका

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 10 Aug 2022 02:56 PM IST
सार

दरअसल, तत्काल सुनवाई योग्य मामलों की शीर्ष कोर्ट में रोजाना पहले मेंशनिंग(mentioning या उल्लेख) की जाती है। सीजेआई की पीठ के समक्ष यह प्रक्रिया होती है, इसके बाद वे किसी पीठ को संबंधित मामले की सुनवाई का निर्देश देते हैं। 

प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण
प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण - फोटो : ANI
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विस्तार

देश के प्रधान न्यायाधीश (CJI) एनवी रमण ने बुधवार को तत्काल सुनवाई के मामलों की मेंशनिंग के लिए वरिष्ठ वकीलों को पक्ष रखने से रोक दिया। जस्टिस रमण ने कहा कि वे इस सिलसिले को खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल व अभिषेक मनु सिंघवी को भी अर्जेंट मामलों की मेंशनिंग की इजाजत नहीं दी और कहा कि वे इसके लिए वकील आन रिकॉर्ड (AoRs) को कल भेजें।


दरअसल, तत्काल सुनवाई योग्य मामलों की शीर्ष कोर्ट में रोजाना पहले मेंशनिंग(mentioning या उल्लेख) की जाती है। सीजेआई की पीठ के समक्ष यह प्रक्रिया होती है, इसके बाद वे किसी पीठ को संबंधित मामले की सुनवाई का निर्देश देते हैं। 

बुधवार को सीजेआई रमण ने वरिष्ठ वकीलों को मेंशनिंग की इजाजत नहीं दी। उन्होंने कहा कि 'वरिष्ठों को मेंशन की इजाजत का सवाल ही नहीं है।' सुप्रीम कोर्ट खुलते ही पहले कक्ष में होने वाली मेंशनिंग में मुख्य रूप से वरिष्ठ वकील पहुंच जाते हैं। बुधवार को भी ऐसा ही हुआ। इस पर सीजेआई रमण ने पंक्ति में खड़े एक वरिष्ठ वकील से साफ शब्दों में कह दिया कि वे वरिष्ठों को नहीं सुनेंगे। ये वरिष्ठ वकील किसी मामले की तत्काल सुनवाई के लिए उनके समक्ष उल्लेख करना चाहते थे। जस्टिस रमण ने वरिष्ठ वकील से कहा कि वे अपने एआरओ (advocate-on-record) को कल भेजें। सीजेआई की पीठ में जस्टिस रमण के अलावा जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली भी मौजूद थे। 

वरिष्ठों का यह काम खत्म करना चाहता हूं : सीजेआई
इस दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और एएम सिंघवी को भी पीठ के समक्ष केस मेंशन करने की इजाजत नहीं दी गई। सीजेआई ने कहा, 'यह बेहतर होगा कि सीनियर्स को मेंशन की इजाजत नहीं दी जाए। मैं वरिष्ठों का यह काम खत्म करना चाहता हूं। सॉरी, मिस्टर सिंघवी मैं वरिष्ठ वकीलों को नहीं सुनूंगा। मिस्टर सिब्बल यह आप पर भी लागू होगा। कृपया अपने एओआर को मेंशन के लिए भेजें'।

बता दें, कुछ दिनों पहले सीजेआई रमण ने कहा था कि उनसे जूनियर वकीलों ने आग्रह किया है कि वरिष्ठों को किसी केस की तत्काल सुनवाई का पीठ से अनुरोध करने की इजाजत न दी जाए।उल्लेखनीय है कि सीजेआई रमण ने पिछले साल 24 अप्रैल को प्रधान न्यायाधीश का पदभार संभाला था। वे 16 माह का कार्यकाल पूरा कर 26 अगस्त को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। उनकी जगह जस्टिस यूयू ललित को सीजेआई नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। जस्टिस ललित मौजूदा सीजेआई रमण के बाद शीर्ष कोर्ट के वरिष्ठतम जज हैं। 

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