अब बाबरी के अवशेष के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगा मुस्लिम पक्ष, जिलानी-धवन में हुई चर्चा

पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Fri, 07 Feb 2020 09:19 AM IST
Zafaryab Jilani
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बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी (बीएमएसी) अगले सप्ताह बाबरी मस्जिद के अवशेष पर दावा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। मुस्लिम पक्ष उस जगह से 1992 में गिराई गई बाबरी मस्जिद के अवशेष हटवाना चाहता है।
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कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने कहा कि हमने अपने वकील राजीव धवन के साथ चर्चा की है और उनका भी विचार है कि हमें मस्जिद के अवशेष पर दावा करना चाहिए। लिहाजा हम अगले सप्ताह दिल्ली में बैठक कर प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे।




मस्जिद के लिए दी गई जगह से मुस्लिम पक्षकार नाखुश
राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के मुस्लिम पक्षकारों ने तोड़ी जा चुकी बाबरी मस्जिद के बदले मस्जिद बनाने के लिए दी गई जमीन की लोकेशन को लेकर नाखुशी जताई है। उनका कहना है कि जमीन नगर केंद्र से बहुत दूर हैं।

मामले के पक्षकार मोहम्मद उमर ने कहा कि जमीन का स्थान प्रमुख जगह नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अयोध्या में किसी भी प्रमुख स्थान पर जमीन आवंटित की जानी चाहिए, लेकिन आवंटित भूमि गांव में है और सड़क से 25 किलोमीटर दूर है, इसलिए यह प्रमुख स्थान नहीं है।

सुन्नी वक्फ बोर्ड को यहां दी गई जमीन
उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बुधवार को पत्रकारों को बताया था कि राज्य सरकार ने लखनऊ राजमार्ग पर अयोध्या में सोहावाल तहसील के धन्नीपुर गांव में जमीन का आवंटन पत्र सुन्नी वक्फ बोर्ड को दे दिया है। भूमि का यह टुकड़ा जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर है।

पहचानी गई जमीन तो अयोध्या तक में नहीं: मुस्लिम पक्षकार
मुकदमे के दूसरे पक्षकार हसबुल्लाह बादशाह खान ने कहा कि इस्माइल फारूकी के मामले में 1994 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट उल्लेख किया था कि मस्जिद और मंदिर 67 एकड़ की सीमा के अंदर होगी। 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, मस्जिद के लिए जमीन अयोध्या में एक अहम स्थान पर दी जाएगी। रौहानी थाना क्षेत्र और सोहावाल तहसील में पहचानी गई जमीन तो अयोध्या तक में नहीं है।

अयोध्या की बराबरी नहीं की जा सकती: जफरयाब जिलानी
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारी सदस्य और वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि शहर का नाम बदलने और उसकी नगरपालिका की सीमा का विस्तार करने का मतलब यह नहीं है कि जिस जमीन की पेशकश की गई है, वह अयोध्या में ही है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले साल दिवाली के दौरान फैज़ाबाद जिले का नाम बदल कर अयोध्या कर दिया था। मुकदमे से संबंधित सभी दस्तावेज़ों में अयोध्या एक छोटा शहर है, फैज़ाबाद का शहर है। अब सरकार द्वारा बनाए गए नए जिले में इस अयोध्या की बराबरी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को दी गई है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड समेत मुस्लिम संगठनों ने बाबरी मस्जिद के बदले में दूसरी जगह जमीन स्वीकार करने की निंदा की है।

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