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राजस्थान में भाजपा की हार के कारण तलाशने में जुटे प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर

संजय मिश्र, नई दिल्ली  Updated Sat, 10 Feb 2018 10:30 PM IST
अमित शाह
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भाजपा आलाकमान राजस्थान के उपचुनावों में मिली पार्टी की करारी हार के कारणों को तलाशने में जुट गया है। केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर खुद प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर इन दिनों उन सीटों पर जाकर कार्यकर्ताओं से कारण समझने में लगे हैं, जहां पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। सूबे में भाजपा की सत्ता रहने के बावजूद पार्टी उम्मीदवार को अजमेर और अलवर लोकसभा के साथ मांडलगढ़ विधानसभा उपचुनाव में करारी हार का मुंह देखना पड़ा है।
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सूत्र बताते हैं कि हार के कारण तलाशने के लिए शनिवार को अजमेर पहुंचकर प्रदेश भाजपा संगठन महामंत्री चंद्रशेखर ने वहां के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के संग बैठक की है। बताया जा रहा है कि जल्द ही कार्यकर्ताओं के मन की टोह लेने वे जल्द ही अलवर भी जाएंगे। उसके बाद वह अपनी रिपोर्ट सीधे भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को सौंपेंगे। पिछले वर्ष ही चंद्रशेखर को यूपी से तबादला कर राजस्थान भाजपा का संगठन महामंत्री बनाया गया है। उन्हें यूपी के संगठन महामंत्री एवं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के करीबी सुनिल बंसल का खास करीबी माना जाता है। यही वजह है कि केंद्रीय नेतृत्व ने खुद चंदशेखर को जमीन पर जाकर कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेने का निर्देश दिया है। 

हार में शाह की रणनीति भी हुई हवा 

अलवर और अजमेर लोकसभा उपचुनाव में भाजपा को न सिर्फ करारी हार का मलाल है। बल्कि इन दोनों सीटों पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की रणनीति भी हवा हो गई है। पन्ना प्रमुख, एक बूथ-दस यूथ और मिस्ड कॉल से बनाए गए पार्टी के प्राथमिक सदस्यों की उनकी रणनीति इन दोनों ही लोकसभा पर ढेर हो गई। लोकसभा चुनाव 2019 से मात्र 4 माह पहले सूबे में राज्य विधानसभा के चुनाव होने हैं। मगर पार्टी के रणनीति की कलई खुलने से आलाकमान की चिंता बढ़नी लाजमी है। चंद माह सूबे का दौरा कर उन्होंने प्रदेश के विधायकों और संगठन के नेताओं से पन्ना प्रमुख से लेकर बूथ समिति को मजबूत बनाने का फरमान जारी किया था। मगर अजमेर और अलवर लोकसभा के उपचुनाव परिणामों पर नजर दौड़ाएं तो शाह की रणनीति हवा-हवाई साबित हुई है। 

अजमेर के तहत आने वाली नसीराबाद विधानसभा की बूथ नंबर 223 पर भाजपा उम्मीदवार को मात्र 1 वोट प्राप्त हुए हैं। तो इस बूथ से कांग्रेस उम्मीदवार को 582 वोट मिले। ऐसी ही स्थिति इसी विधानसभा के बूथ नंबर 224 पर रही। यहां भाजपा उम्मीदवार को मात्र 2 मतों से संतोष करना पड़ा तो कांग्रेस उम्मीदवार को 500 वोट मिले हैं।

भाजपा उम्मीदवार को सबसे शर्मनाक हार अजमेर लोकसभा के दूदू विधानसभा के बूथ नंबर 49 पर झेलनी पड़ी है। विश्व की सबसे बड़ी पार्टी के उम्मीदवार को यहां शून्य वोट हासिल हुए हैं। तो अलवर लोकसभा सीट पर भी ऐसे बूथों की संख्या खासी है जहां भाजपा उम्मीदवार को 12-14 मतों से संतोष करना पड़ा है।

सूत्र बताते हैं कि इन आंकड़ों का अध्ययन करने के बाद से राजस्थान को लेकर भाजपा आलाकमान काफी चिंतित है। यही वजह है कि समय रहते उसने हार के कारण तलाशने शुरू कर दिए हैं। ताकि समय रहते सुधार की कवायद कर सके। 

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