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Bihar Politics: बिहार में टूट के कगार पर भाजपा-जदयू गठबंधन, विपक्षी दलों से संपर्क साध रहा JDU, बैठक आज

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली/पटना। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 09 Aug 2022 09:10 AM IST
सार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आठ साल पुराने इतिहास को दोहराने के मुहाने पर खड़े हैं। भाजपा जहां उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद के जरिये गठबंधन बचाने की अंतिम कोशिश कर रही है, वहीं जदयू राज्य के सभी विपक्षी दलों के संपर्क में है।

नीतीश कुमार और ताराकिशोर प्रसाद
नीतीश कुमार और ताराकिशोर प्रसाद - फोटो : PTI
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विस्तार

बिहार में तेजी से बदले राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भाजपा-जदयू गठबंधन पर संकट के बादल मंडराने लगें हैं। वहीं, राजद और जदयू में नजदीकी भी बढ़ती दिख रही है। जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह के इस्तीफे के बाद गहमागहमी काफी तेज हो गई है। माना जा रहा है कि बहुत जल्द नए गठबंधन के साथ नई सरकार बन सकती है। मंगलवार को जदयू विधायकों और सांसदों की बैठक में अंतिम निर्णय हो सकता है। जदयू पटना में आज सुबह 11 बजे बैठक करेगी। इसी वक्त राजद भी अलग अपनी एक बैठक करेगी।



जदयू राज्य के सभी विपक्षी दलों के संपर्क में
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आठ साल पुराने इतिहास को दोहराने के मुहाने पर खड़े हैं। भाजपा जहां उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद के जरिये गठबंधन बचाने की अंतिम कोशिश कर रही है, वहीं जदयू राज्य के सभी विपक्षी दलों के संपर्क में है। दरअसल भाजपा-जदयू के बीच चौड़ी हुई मतभेद की खाई की वजह पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह बने। नीतीश को आशंका है कि भाजपा महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की तर्ज पर बिहार में आरसीपी के जरिये उन्हें सत्ता से बेदखल करने की कोशिश कर रही है।


नीतीश के करीबी सांसद के मुताबिक इस आशंका के पर्याप्त कारण हैं। आरसीपी को नीतीश की सहमति के बिना मोदी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। आरसीपी भाजपा के उस शीर्ष नेता के करीबी हैं, जिन्होंने महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे को सत्ता से बेदखल करने की पटकथा लिखी। उन्हीं के इशारे पर आरपीसी ने गुपचुप तरीके से राज्यसभा चुनाव के दौरान जदयू विधायकों की बैठक बुलाई। अब वही आरसीपी नया दल बनाने में जुटे हैं और उनका लक्ष्य हर हाल में जदयू और खास कर नीतीश कुमार को कमजोर करना है।

नीतीश-तारकिशोर की बैठक पर नजर
जदयू के अलग राह पकड़ने के संकेत के बाद भाजपा गठबंधन बचाने की अंतिम कोशिश कर रही है। इस कड़ी में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल, डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद सहित कुछ वरिष्ठ नेताओं ने नीतीश के करीबी और राज्य के शिक्षा मंत्री विजय चौधरी से मुलाकात की है। इसके बाद नीतीश और तारकिशोर की मुलाकात प्रस्तावित है। इस मुलाकात के बाद मंगलवार को जदयू विधायकों और सांसदों की बैठक होगी। अंतिम निर्णय इसी बैठक में होगा।

राजद-जदयू में दिख रही नजदीकी
गठबंधन बचाने के बीच राजद और जदयू में नजदीकी दिख रही है। तेजस्वी यादव ने कहा है कि हम नीतीश कुमार और जदयू को गले लगाने को तैयार हैं बशर्ते वह भाजपा से नाता तोड़ लें। सूत्रों का कहना है कि नीतीश ने व्यक्तिगत स्तर पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, तेजस्वी यादव और वाम दलों से संपर्क साधा है। यही कारण है कि कांग्रेस के बिहार प्रभारी भक्त चरण दास बिहार पहुंच गए हैं। 

गठबंधन टूट का ठीकरा जदयू पर फोड़ना चाहती है भाजपा
सूत्र मानते हैं कि मतभेद की खाई बहुत चौड़ी हो गई है। इसे पाट पाना फिलहाल संभव नहीं दिख रहा। यही कारण है कि बैठकों के जरिये भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि उसने गठबंधन बचाने की पूरी कोशिश की। जबकि जदयू सूत्रों का कहना है कि नीतीश संभवत: 11 अगस्त को सोनिया गांधी से मुलाकात कर सकते हैं।

जदयू में हिम्मत है तो सीधे भाजपा से मुकाबला करे : चिराग
लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने सोमवार को जदयू पर निशाना साधा। उन्होंने नीतीश कुमार को नुकसान पहुंचाने की साजिश में उनकी संलिप्तता का आरोप लगाने के बजाय जदयू से सीधे भाजपा से मुकाबला करने की हिम्मत दिखाने के लिए ललकारा। पासवान ने एक प्रेसवार्ता में दावा किया कि मुख्यमंत्री को उनसे अधिक अपने करीबियों से खतरा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार ने जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह का अपमान किया है और पहले शरद यादव व जॉर्ज फर्नांडिस को अपमानित किया था। चिराग ने कहा, जदयू अपने आप में बंटा हुआ घर है। आरसीपी को निकलने के लिए मजबूर किया गया, लेकिन नीतीश कुमार को ललन और उपेंद्र कुशवाहा जैसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।

बिहार विधानसभा दलीय स्थिति
राजद के 79, भाजपा के 77, जदयू के 45, कांग्रेस के 19, सीपीआई (एमएल) के 12, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के 4, सीपीआई और सीपीआई (एम) के 2-2 विधायक हैं। इसके अलावा एआईएमआईएम के एक व एक निर्दलीय विधायक हैं। विधानसभा की एक सीट रिक्त है। बिहार विधानसभा में कुल 243 सदस्य हैं। इस लिहाज से बहुमत के लिए किसी भी दल को 122 विधायकों की जरूरत होगी।

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