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Bihar Politics: क्या बिहार में भाजपा के हाथ से निकल गई बाजी? अगर नीतीश नहीं उठाते यह कदम तो बन जाते 'शिवसेना'

Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 08 Aug 2022 07:19 PM IST
सार

Bihar Politics: कहा जाता है कि भाजपा के बिहार से आने वाले नेता भूपेंद्र यादव पूर्व जदयू नेता आरसीपी सिंह से ज्यादा करीबी रिश्ता बनाए हुए थे। भाजपा नेता आरसीपी सिंह के अंदर एक नए ‘एकनाथ शिंदे’ की तलाश कर रहे थे, लेकिन नीतीश पूरी परिस्थिति पर नजर रखे हुए थे...

Bihar Politics: nitish kumar with rcp singh
Bihar Politics: nitish kumar with rcp singh - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार

बिहार में नीतीश कुमार के अगले दांव पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। वे बिहार की सत्ता में भाजपा के साथ बने रहते हैं, या आरजेडी के साथ एक बार फिर पुराने गठबंधन की ओर जाएंगे, इस पर अभी भी तस्वीर साफ नहीं है। अगले 48 घंटों के अंदर यह तस्वीर पूरी तरह साफ होने का अनुमान है। इन परिस्थितियों के बीच भाजपा ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है, तो वहीं आरजेडी, कांग्रेस, हम और लोजपा (रामविलास) अपने-अपने विधायकों के साथ भविष्य को लेकर बैठकें कर रहे हैं। लेकिन भाजपा नेताओं ने इस मामले पर जिस तरह चुप्पी साध रखी है, अनुमान लगाया जा रहा है कि बाजी उसके हाथ से निकल चुकी है और नीतीश कुमार ने एक बार फिर खेमा बदलने का मन बना लिया है। इसका नुकसान अगले बिहार विधानसभा चुनाव में ही नहीं, उसके पहले 2024 के लोकसभा चुनावों में ही देखने को मिल सकता है।



दरअसल, बिहार भाजपा नेताओं के मन में सरकार बनने के समय से ही यह कसमसाहट बनी हुई थी कि उनके खाते में ज्यादा सीटें होने के बाद भी उन्हें नीतीश कुमार का दबाव झेलना पड़ रहा था। पार्टी नेता चाहते थे कि अब राज्य में उनका मुख्यमंत्री होना चाहिए। लेकिन पार्टी के केंद्रीय नेताओं के इशारे पर चुप्पी साधे रखी गई। लेकिन धीरे-धीरे यह आवाज बड़ी नाराजगी में तब्दील होती गई। समय-समय पर जदयू-भाजपा नेताओं के बीच का मनमुटाव बढ़ता गया और यह बिहार विधानसभा के पटल पर भी देखा गया। इसी नाराजगी के बीच महाराष्ट्र प्रकरण के बाद बिहार भाजपा के नेताओं को लग रहा था कि यदि वे शिवसेना की तर्ज पर जदयू में तोड़फोड़ करने में कामयाब हो जाते हैं तो वे बिहार की बाजी पलट सकते हैं।

आरसीपी सिंह के अंदर ‘एकनाथ शिंदे’ की तलाश

कहा जाता है कि भाजपा के बिहार से आने वाले नेता भूपेंद्र यादव पूर्व जदयू नेता आरसीपी सिंह से ज्यादा करीबी रिश्ता बनाए हुए थे। जदयू नेताओं का आरोप है कि भाजपा नेता आरसीपी सिंह के अंदर एक नए ‘एकनाथ शिंदे’ की तलाश कर रहे थे, लेकिन मंजे नेता नीतीश कुमार बेहद सधे अंदाज में पूरी परिस्थिति पर नजर रखे हुए थे। उन्होंने समय रहते न केवल परिस्थिति को समझा और अपने अनुसार नई रणनीति बनाकर भाजपा को दबाव में लाने में भी काययाब रहे।  

भाजपा और जदयू, दोनों दलों के नेताओं को यह लग रहा था कि दूसरी पार्टी ने उसका लाभ उठाकर अपने को मजबूत करने का काम किया है। भाजपा नेता अंदरखाने यह मानते हैं कि यदि 2019 में जदयू ने भाजपा के साथ गठबंधन न किया होता, तो उसके इतने सांसद नहीं आते, वहीं जदयू नेताओं को लगता है कि यदि वे साथ नहीं होते तो बिहार की 40 में से 39 सीटों पर एनडीए को कामयाबी नहीं मिलती।

भाजपा को क्या होगा नुकसान

यदि नीतीश कुमार राजद के साथ सरकार बनाने का निर्णय लेते हैं, तो भाजपा की उन कोशिशों को पहला बड़ा झटका लगेगा जिसमें पार्टी 2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर बेहद गंभीरता के साथ तैयारी में जुट गई थी। बिहार से अकेले 40 लोकसभा सीटें आती हैं। राज्य के मतदाताओं में जातीय आधारों पर इतना बड़ा बिखराव है कि भाजपा अकेले के दम पर बड़ी कामयाबी हासिल करने के बारे में नहीं सोच सकती। वहीं, जदयू, आरजेडी और हम के साथ आने से राज्य में एनडीए को तगड़ा झटका लग सकता है।

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