'कोवैक्सीन' : तीसरे चरण के ट्रायल की अड़चनें खत्म, पूरा हो गया ये बड़ा काम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Thu, 07 Jan 2021 03:39 PM IST
कोवैक्सीन
कोवैक्सीन - फोटो : पीटीआई
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देश में कोरोना वैक्सीन को मंजूरी मिलने को लेकर उठे विवाद के बाद गुरुवार को भारत बायोटेक ने एक बड़ी बाधा पार कर ली है। दरअसल भारत बायोटेक ने अपनी 'कोवैक्सीन' के तीसरे चरण के ट्रायल को शुरू करने की घोषणा कर दी है। कंपनी के अनुसार, उसने इस चरण के लिए सफलतापूर्वक वॉलेंटियर के नामांकन का काम पूरा कर लिया है।
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बता दें कि इससे पहले भारत बायोटेक ने कहा था कि तीसरे चरण के ट्रायल के लिए उसे 26 हजार वॉलंटियर्स की भर्ती करनी थी। इनमें से 23,000 वॉलंटियर्स की भर्ती हो चुकी थी।  कंपनी ने कहा था कि कोवैक्सीन के तीसरे चरण का ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल नवंबर के मध्य में शुरू हुआ, जिसका लक्ष्य था पूरे देश में 26,000 वॉलंटियर्स का था।


यह कोविड 19 वैक्सीन के लिए भारत का पहला और तीसरे चरण का एकमात्र प्रभावी अध्ययन है। साथ ही भारत में किसी भी वैक्सीन के तीसरे चरण के लिए अब तक का सबसे बड़ा ट्रायल है। 

आपात इस्तेमाल के लिए मंजूरी की सिफारिश
दूसरी तरफ इससे पहले भारत के केंद्रीय औषधि प्राधिकरण की एक विशेषज्ञ समिति ने कोवैक्सीन को कुछ शर्तों के साथ आपात इस्तेमाल के लिए मंजूरी देने की सिफारिश की थी। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की कोविड-19 संबंधी एक विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने ऑक्सफोर्ड के कोरोना वायरस रोधी टीके को भी सशर्त आपात इस्तेमाल के लिए मंजूरी देने की भी सिफारिश की थी। जिसके बाद केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन वैक्सीन के आपात इस्तेमाल की मंजूरी दे दी थी।

बता दें कि कोवैक्सीन को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के साथ मिलकर भारत बायोटेक द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है। भारत बायोटेक ने सात दिसंबर को स्वदेश में विकसित कोवैक्सीन टीके की मंजूरी के लिए भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) के समक्ष अर्जी दी थी।




कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी उठाया था सवाल
बता दें कि 'कोवैक्सीन' के तीसरे चरण का ट्रायल पूरा किए बिना केंद्रीय लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने मंजूरी दे दी थी जिसके बाद कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इसपर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि हम सिर्फ इतना ही कह रहे हैं कि अगर टीका प्रभावी रूप से काम किया तो ये हमारे लिए बहुत ही गर्व की बात होगी। लेकिन तीसरे चरण के ट्रायल से पहले इसे मंजूरी देना वैज्ञानिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, जो अब तक कहीं भी दुनिया में नहीं हुआ।

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