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क्यों गिरी बर्लिन की दीवार, जिसका अयोध्या पर दिए भाषण में पीएम मोदी ने भी किया जिक्र

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 09 Nov 2019 08:03 PM IST
berlin wall
berlin wall - फोटो : Social Media
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अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया। अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी ने अयोध्या पर आए फैसले की तुलना बर्लिन की दीवार गिरने से की। उन्होंने कहा कि आज के दिन ही बर्लिन की दीवार गिरी थी और आज के दिन ही सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है। 
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बता दें कि आज से 30 साल पहले नौ नवंबर 1989 को बर्लिन की दीवार गिराई गई थी। गूगल ने भी आज डूडल बनाकर इस दिन को याद किया। इस दीवार के बनाए जाने के कारण ही शीत युद्ध के दौरान पूर्वी यूरोप के कम्युनिस्ट पश्चिमी यूरोप में प्रवेश नहीं कर पाए थे। इस दीवार के गिरने के साथ ही कम्युनिस्ट शासन खत्म हो गया था। दीवार के गिरने के बाद, जब पूर्वी यूरोप के कम्युनिस्ट शासन में रह रहे लोग पश्चिमी यूरोप के लोगों से मिले तो उन्होंने अपनी आप-बीती बताई। 

बर्लिन की दीवार क्यों गिराई गिरी

दरअसल, दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद यूरोप विचारधारा के आधार पर दो हिस्सों में बंट गया। जहां एक तरफ पूर्वी यूरोप का हिस्सा था जिस पर सोवियत संघ की कम्युनिस्ट विचारधारा थी, वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी यूरोप के देश थे जिनपर अमेरिका की पूंजीवादी विधारधारा हावी थी। 

दूसरे विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद बर्लिन शहर में अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई थी। एक और जहां पूर्वी बर्लिन में सोवियत संघ का कब्जा था वहीं, दूसरी तरफ पश्चिमी जर्मनी का पश्चिमी बर्लिन था जिस पर अमेरिका, फ्रांस और इंग्लैंड का कब्जा था। 

पूर्वी बर्लिन में उस दौरान हालात कुछ ठीक नहीं थे। इसलिए वहां से लोग पश्चिमी बर्लिन में जाने लगें। उस दौरान वहां लोकतंत्र था और हालात भी ठीक थे। सरकार ने लोगों के इस पलायन को रोकने के लिए पूर्वी और पश्चिमी बर्लिन सीमा पर कंक्रीट की बड़ी दीवार बनवा दी। इससे पहले वहां केवल तारबंदी की थी। साथ ही सीमा पर कई हजार जवानों को तैनात किया गया था जिन्हें आदेश था कि सीमा पार करने वालों को गोली मार दी जाए। 

बर्लिन की दीवार से जुड़ी कुछ खास बातें:- 

  • बर्लिन की दीवार का निर्माण 13 अगस्त 1961 को शुरू हुआ था। वहीं, 9 नवंबर, 1989 के बाद इसे तोड़ दिया गया था।
  • द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद शीत युद्ध का प्रतीक बनी इस दीवार को बनाने की मंजूरी सोवियत संघ के नेता निकिता ख्रुश्चेव ने दी थी।
  • 1980 के दशक में सोवियत संघ के पतन के बाद सीमा नियमों से सख्ती कम हुई।
  • पूर्वी जर्मनी में लोगों ने प्रदर्शन किए और नौ नवंबर 1989 को घोषणा की गई कि सीमा पर आवागमन पर से रोक हटा दी गई है।
  • इस घोषणा के बाद दीवार को तोड़ दोनों तरफ के लोग दीवार पार कर आपस में एक-दूसरे से गले मिले।
  • धीरे-धीरे सीमा टूटती गई और लोग दीवार के टुकड़े तोड़कर यादगार के लिए अपने घर ले गए।
  • तीन अक्तूबर 1990 को आधिकारिक तौर पर जर्मनी फिर से एक हो गया।
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