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Bengal: पशु तस्करी मामले में चार्जशीट दाखिल, सीबीआई के समक्ष पेश नहीं हुए टीएमसी नेता अनुब्रत मंडल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: Amit Mandal Updated Mon, 08 Aug 2022 11:00 PM IST
सार

अनुब्रत मंडल की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी हुसैन ने करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की। सीबीआई के एक अधिकारी ने कहा कि जांचकर्ताओं को उसके कब्जे में 49 संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं।

सीबीआई
सीबीआई - फोटो : social media
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विस्तार

सीबीआई ने सोमवार को आसनसोल की एक अदालत में पशु तस्करी मामले में अपना चौथा आरोपपत्र पेश किया, जिसमें टीएमसी नेता अनुब्रत मंडल के अंगरक्षक सहगल हुसैन सहित 11 लोगों को आरोपी बनाया गया है। 40 पन्नों के आरोप पत्र में सीबीआई ने आरोप लगाया कि हुसैन ने पशु तस्करों से धन को अनुब्रत मंडल तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो टीएमसी के बीरभूम अध्यक्ष हैं।



मंडल की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी हुसैन ने करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की। सीबीआई के एक अधिकारी ने कहा कि जांचकर्ताओं को उसके कब्जे में 49 संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। उन्होंने कहा कि हुसैन के मोबाइल फोन के कॉल रिकॉर्ड से पता चलता है कि वह तस्करों और पशुपालकों के सीधे संपर्क में था। सहगल के सोमवार को सीबीआई की हिरासत में 60 दिन पूरे हो गए और एजेंसी को कानून के मुताबिक शाम पांच बजे तक अपना प्रारंभिक आरोप पत्र दाखिल करना था।


अधिकारी ने कहा कि मंडल को सीबीआई ने दिन के दौरान समन किया था ताकि कुछ सूचनाओं को सहगल से पूछताछ करके हासिल करने की पुष्टि की जा सके। हालांकि, वह अपने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए नहीं पहुंचे। सीबीआई ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर चल रहे करोड़ों रुपये के पशु तस्करी रैकेट में अपनी जांच के तहत मंडल से दो बार पूछताछ की थी। ताजा चार्जशीट में सीबीआई ने फरार टीएमसी नेता बिनय मिश्रा के भाई बिकाश मिश्रा का भी नाम लिया है।

सीबीआई के समक्ष पेश नहीं हुए अनुब्रत मंडल 
मवेशी तस्करी मामले में तृणमूल कांग्रेस नेता अनुब्रत मंडल केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के समक्ष सोमवार को पेश नहीं हुए। एजेंसी सूत्रों के मुताबिक उन्होंने जांच एजेंसी को सूचित किया था कि वह उपस्थित नहीं रह पाएंगे।  एजेंसी के एक सूत्र ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस नेता अनुब्रत मंडल ने सीबीआई को सूचित किया था कि वह पशु तस्करी मामले की जांच के सिलसिले में सोमवार को उसके समक्ष पेश नहीं हो पाएंगे। 

समझा जाता है कि पार्टी के बीरभूम जिला अध्यक्ष मंडल ने मेडिकल जांच के कारण केंद्रीय जांच एजेंसी के सामने पेश होने में असमर्थता जताते हुए एक ईमेल भेजा है। सूत्र ने कहा कि सीबीआई अधिकारियों ने मंडल का ईमेल प्राप्त होने की बात स्वीकारी है। पार्टी के एक सूत्र ने बताया कि तृणमूल नेता स्वास्थ्य जांच के लिए कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम अस्पताल जा रहे हैं। 

सीबीआई ने 5 अगस्त को तृणमूल के बीरभूम जिला अध्यक्ष मंडल को सोमवार को पेश होने के लिए तलब किया था। इस मामले की जांच के सिलसिले में संघीय एजेंसी पहले उनसे दो बार पूछताछ कर चुकी है। सीबीआई ने हाल ही में इस मामले में जिले के विभिन्न स्थानों पर छापे मारे हैं। मंडल के अंगरक्षक सहगल हुसैन को भी जांच एजेंसी ने गिरफ्तार किया है।

टीएमसी नेताओं के संपत्ति मामले में कोर्ट ने ईडी को बनाया पक्षकार
इस बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने 2017 के एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बंगाल के सात मंत्रियों समेत 19 नेताओं की संपत्ति वृद्धि मामले में ईडी को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति राजर्षि भारद्वाज की खंडपीठ ने बिप्वल चौधरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया कि जिसमें तृणमूल कांग्रेस के 19 विधायकों, सांसदों और राज्य सरकार के मंत्रियों की संपत्ति में जबरदस्त वृद्धि पर सवाल उठाय गया था। चौधरी ने इन नेताओं द्वारा विभिन्न चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करते समय केंद्रीय चुनाव आयोग के पास जमा किए गए हलफनामों का हवाला दिया है। 

इनके नाम शामिल

  • जनहित याचिका में बंगाल के दो दिवंगत मंत्रियों सुब्रत मुखर्जी व साधन पांडे के भी नाम हैं। 
  • इसके अलावा राज्य के शहरी विकास मंत्री व कोलकाता के मेयर फिरहाद हाकिम, शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु, वन मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक, कानून मंत्री मलय घटक, सहकारिता मंत्री अरूप राय, आपदा प्रबंधन मंत्री जावेद अहमद खान और पंचायत मामलों की राज्य मंत्री सिउली साहा का नाम भी इसमें शामिल है। 
  • इस सूची में बंगाल विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी और बैरकपुर से लोकसभा सांसद अर्जुन सिंह के भी नाम हैं, जो हाल में भाजपा से तृणमूल में लौटे हैं। 
  • अन्य प्रमुख नामों में सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब, विधायक मदन मित्रा और स्वर्ण कमल साहा शामिल हैं। 
  • सूची में बंगाल के पूर्व वित्त मंत्री और राज्य सरकार के वर्तमान प्रधान वित्तीय सलाहकार अमित मित्रा का भी नाम इसमें शामिल है।

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