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जम्मू-कश्मीर पर सर्वदलीय बैठक आज: राजनीतिक संवाद की शुरुआत, क्या निकलेगा कोई रास्ता?

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Amit Mandal Updated Thu, 24 Jun 2021 01:43 AM IST

सार

  • गुपकार समेत प्रदेश की 14 पार्टियां होंगी शामिल, केंद्र परिसीमन पर तो गुपकार पूर्ण राज्य का दर्जा व अनुच्छेद 370 की बहाली पर होगा मुखर
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक बृहस्पतिवार को राजधानी दिल्ली में होगी
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All party meeting on Jammu Kashmir
All party meeting on Jammu Kashmir - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करने की मंशा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक बृहस्पतिवार को राजधानी दिल्ली में होगी। इसमें शामिल होने के लिए पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, भाजपा नेता रविंदर रैना व कविंदर गुप्ता दिल्ली पहुंच गए हैं जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला बृहस्पतिवार पहुंचेंगे। यह बैठक केंद्रशासित प्रदेश के सियासी दलों और केंद्र के बीच संवाद की शुरुआत भले ही हो लेकिन किसी ठोस नतीजे की उम्मीद नहीं है। 
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बैठक में पीएम मोदी समेत कम से कम चार केंद्रीय मंत्री और जम्मू-कश्मीर से गुपकार समूह समेत 14 दल शामिल हो रहे हैं। हालांकि बैठक को लेकर किसी एजेंडे का औपचारिक एलान नहीं हुआ है लेकिन माना जा रहा है कि दोनों पक्ष विपरीत एजेंडे के साथ बैठक में शामिल हो रहे हैं। संकेतों के मुताबिक, नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (पीसी) जैसे पुराने दल पूर्ण राज्य का दर्जा और अनुच्छेद 370 की बहाली पर मुखर होंगे। वहीं केंद्र सरकार प्रदेश में चल रही परिसीमन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए सभी दलों के समर्थन का दबाव बनाएगी।


सूत्रों के मुताबिक, केंद्र परिसीमन के जरिए श्रीनगर पर जम्मू का राजनीतिक वर्चस्व कायम करना चाह रही है। बैक चैनल बातचीत में केंद्र ने साफ कर दिया है कि राज्य में चुनावी प्रक्रिया परिसीमन पूरा होने के बाद ही शुरू होगी। सूत्रों ने बताया कि अगर इन मुद्दों पर टकराव होता है तो केंद्र प्रदेश में राजनीतिक प्रक्रिया परवान नहीं चढ़ने देने का ठीकरा गुपकार और स्थानीय दलों पर फोड़ सकती है।

केंद्र ने प्रदेश को लेकर गंभीरता का दिया संदेश 
सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री ने सर्वदलीय बैठक की पहल कर यह संदेश दिया है कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर को लेकर गंभीर है और राज्य का दर्जा वापस बहाल करने के लिए जरूरी राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करना चाहती है। 

नई सियासी धारा कायम करने को सक्रिय दलों को आमंत्रण नहीं
आमंत्रण की सूची में न तो पंच, सरपंच, ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल (बीडीसी), डिस्ट्रिक डेवलपमेंट काउंसिल (डीडीसी) की प्रतिनिधि संस्थाएं हैं और न ही वे दल हैं जो 5 अगस्त 2019 के बाद से नई सियासी धारा कायम करने को लेकर काफी सक्रिय हैं। इन नए दलों में सिर्फ अपनी पार्टी को आमंत्रित किया गया है। आमंत्रित किए गए दलों में मुख्य रूप से वही दल है जिनके नेताओं को केंद्र ने प्रदेश की बदहाली के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए लंबे समय तक नजरबंद रखा था।

इन्हें किया गया आमंत्रित
नेशनल कॉन्फ्रेंस से फारूक अब्दुल्ला-उमर अब्दुल्ला, कांग्रेस से गुलाम नबी आजाद, तारा चंद व जीए मीर, पीडीपी से महबूबा मुफ्ती, जे-के अपनी पार्टी के अल्ताफ बुखारी, भाजपा से रविंदर रैना, निर्मल सिंह व कविंदर गुप्ता, माकपा से एमवाई तारिगामी, नेशनल पैंथर्स पार्टी के प्रोफेसर भीम सिंह, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के सज्जाद गनी लोन

शाह, डोभाल भी रहेंगे मौजूद
बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, केंद्रीय गृहसचिव के भी मौजूद रहने की उम्मीद है। 0000

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