अखिलेश ने दे दिया संकेत, 2019 में तीसरा मोर्चा देगा भाजपा-कांग्रेस को चुनौती!

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Published by: शशांक गौर Updated Wed, 26 Dec 2018 07:13 PM IST
2019 चुनाव और तीसरे मोर्चे की कवायद
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2019 में भाजपा के खिलाफ महागठबंधन से इतर तीसरा मोर्चा के गठन की कवायद तेज होती जा रही है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज इसके साफ संकेत दे दिए कि वह भी इसका हिस्सा बन सकते हैं। बुधवार को अखिलेश के दो ऐसे बयान आए जिन्होंने बता दिया कि 2019 में सियासी जंग की क्या सूरत हो सकती है।
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केसी राव की मुहिम

अखिलेश ने टीआरएस प्रमुख केसी राव की मुहिम का समर्थन किया जिसके तहत वह गैर भाजपा-गैर कांग्रेस दलों के बीच तालमेल बिठाने की जुगत में लगे हैं। अखिलेश ने बयान दिया- पिछले कई महीनों से सभी पार्टियों को साथ लाने की कोशिशें हो रही हैं। मैं तेलंगाना के सीएम को बधाई देता हूं कि वह इस दिशा में काम कर रहे हैं। वह फेडरल फ्रंट को एक मंच पर लाने की कोशिशों में जुटे हैं। मैं उनसे मिलने हैदराबाद जाऊंगा। 


उनका पहला बयान भी कुछ इसी तरफ इशारा कर रहा था। मध्यप्रदेश कैबिनेट में सपा विधायक क मंत्री नहीं बनाए जाने से वह बेहद नाराज आए। उन्होंने तंज कसते हुए इसे अपने लिए फायदेमंद करार दिया। अखिलेश ने कहा- हमने एमपी में कांग्रेस को बिना शर्त समर्थन दिया है, फिर भी कांग्रेस ने हमारे विधायक को मंत्री नहीं बनाया। कांग्रेस ने यूपी में हमारा रास्ता साफ कर दिया है। 

अखिलेश की राहुल को ना 

बाद में अखिलेश ने के सी राव से मुलाकात की बात कह तीसरे मोर्चे के गठन की कवायद को और मजबूती दे दी। अखिलेश पहले ही साफ कर चुके हैं कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को गठबंधन में शामिल करने के इच्छुक नहीं हैं। यहां सपा-बसपा मिलकर भाजपा का मुकाबला करेंगे। इससे संकेत मिलता है कि वह 2019 में गैर भाजपा-गैर कांग्रेस मोर्चा बनाने को लेकर गंभीर हैं और के सी राव इसी कोशिश में जुटे भी हुए हैं। 

राव इन दिनों दिल्ली में हैं और तमाम क्षेत्रीय दलों के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। अगर उनकी ये कोशिश कामयाब रही तो 2019 में तीसरा मोर्चा नजर आ सकता है जो कांग्रेस और भाजपा दोनों को चुनौती देगा। तीसरे मोर्चे का गठन कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा झटका होगा जो राहुल गांधी के नेतृत्व में भाजपा को दोबारा सत्ता में आने से रोकने के लिए पुरजोर कोशिश में जुटी है। 
 
बता दें कि इससे पहले कांग्रेस को समर्थन का एलान करते हुए मायावती ने कहा था कि वह एमपी में भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस को बिना शर्त समर्थन दे रही हैं। उन्होंने कांग्रेस को अहंकार से भरा हुआ करार दिया था। इन बयानों ने साफ कर दिया कि 2019 में उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा अपने गठबंधन में कांग्रेस को लेने के इच्छुक नहीं हैं। 

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