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Ahmedabad Serial Blast Case : दो हफ्तों तक अलग-अलग जगह मिले थे 29 जिंदा बम, जानें कैसे रची गई पूरी साजिश

एजेंसी, नई दिल्ली/अहमदाबाद। Published by: योगेश साहू Updated Sat, 19 Feb 2022 02:38 AM IST
सार

आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने कुछ मीडिया संस्थानों में ईमेल भेजकर इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। खास बात यह है कि अहमदाबाद धमाकों में बड़ा फैसला सुनाते हुए विशेष कोर्ट ने अपने आदेश में इस अंदेशे से इनकार नहीं किया है कि आतंकियों ने इन धमाकों के जरिये गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को मारने की साजिश रची थी। वरिष्ठ अधिवक्ता ने इस बात की पुष्टि की है कि कोर्ट ने आदेश में कहा कि इस तर्क को खारिज नहीं कर सकते।

साल 2008 में अहमदाबाद में सिलसिलेवार धमाके हुए थे
साल 2008 में अहमदाबाद में सिलसिलेवार धमाके हुए थे - फोटो : social Media

विस्तार

26 जुलाई, 2008 में अहमदाबाद में सिलसिलेवार 21 बम धमाकों को अंजाम दे चुके दहशतगर्दों के दिमाग में दहशत की और बड़ी दास्तां लिखने की साजिश चल रही थी। अहमदाबाद, सूरत समेत अलग-अलग शहरों में दो हफ्तों तक पुलिस को 29 जिंदा बम मिले थे। हालांकि इनमें से एक भी नहीं फटा था। 



तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आरआर सरवैया के मुताबिक इन बमों की बैटरी कमजोर थी, जिस कारण बड़ी तबाही बच गई। तत्कालीन डीजीपी आशीष भाटिया के मुताबिक क्राइम ब्रांच ने इन धमाकों की साजिश का खुलासा 20 दिनों के भीतर कर दिया था। 


15 अगस्त 2008 तक 11 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था। गुजरात के सबसे बड़े बम धमाके की जांच के लिए पांच राज्यों की पुलिस जुटी थी। राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक की पुलिस ने कई शहरों में छापे मारे थे।

इंडियन मुजाहिदीन ने ईमेल भेजकर ली थी जिम्मेदारी
आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने कुछ मीडिया संस्थानों में ईमेल भेजकर इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। मेल में गुजरात दंगों की कुछ तस्वीरें थीं। इसमें दावा किया गया था कि यह गोधरा दंगों और 1992 में जामा मस्जिद विध्वंस का बदला है।

मोदी को मारने की साजिश से कोर्ट का इनकार नहीं 
अहमदाबाद धमाकों में बड़ा फैसला सुनाते हुए विशेष कोर्ट ने अपने आदेश में इस अंदेशे से इनकार नहीं किया कि आतंकियों ने इन धमाकों के जरिये गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को मारने की साजिश रची थी। वरिष्ठ अधिवक्ता यतींद्र ओझा ने इस बात की पुष्टि की है कि कोर्ट ने आदेश में कहा कि इस तर्क को खारिज नहीं कर सकते। साजिशकर्ताओं ने एक बम उस अस्पताल में भी रखा था जहां धमाके के पीड़ितों को भर्ती कराया गया। उनका अनुमान था कि सीएम मोदी घायलों को देखने वहां पहुंचेंगे और धमाके में मारे जाएंगे। 

विस्फोटक से खुली थीं कड़ियां
बम बनाने के लिए इस्तेमाल किये गए विस्फोटकों से ही इस पूरी साजिश की कड़ियां खुली थीं। इंडियन मुजाहिदीन के इशारे पर आतंकियों ने इन धमाकों के लिए बम में एल्युमीनियम नाइट्रेट, फर्टिलाइजर और फ्यूल ऑयल (एएनएफओ) का इस्तेमाल किया था। पहली बार ऐसा प्रयोग हुआ था और पुलिस ने इसे ही सबसे बड़ी कड़ी बनाकर साजिश के तारों को जोड़ा था।
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