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जम्मू-कश्मीर में अमन: 'गुपकार' के साथ बैठक से पीएम की कई मुश्किलें हुई आसान

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 25 Jun 2021 04:24 PM IST
सार

अंतरराष्ट्रीय मामलों के एक्सपर्ट समीर पाटिल कहते हैं, प्रधानमंत्री मोदी आने वाले समय में जब अमेरिका या किसी दूसरे राष्ट्र की यात्रा करेंगे तो इस मुद्दे पर किए जा रहे दुष्प्रचार का जवाब दे सकेंगे। संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में भी प्रधानमंत्री उन देशों का मुंह बंद कर सकते हैं, जिन्होंने 'अनुच्छेद 370' की आड़ में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे...

जम्मू-कश्मीर के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
जम्मू-कश्मीर के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : ANI

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों, खासतौर पर 'गुपकार' समझौते के नेताओं को अपने आवास पर बुलाकर प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी कई मुश्किलें आसान कर ली हैं। 'अनुच्छेद 370' की समाप्ति के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली और देश के लोकतंत्र पर अंगुली उठाने वालों को अब कठोर शब्दों में जवाब दिया जा सकेगा। गुपकार के जिन नेताओं ने जम्मू-कश्मीर के मसले को अंतरराष्ट्रीय जगत में भारत की छवि खराब करने वाला कदम बताया था, अब वे सब प्रधानमंत्री आवास पर साढ़े तीन घंटे चली बैठक में खुलकर बोले हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों के एक्सपर्ट 'गेटवे हाउस मुंबई' के रिसर्च फेलो समीर पाटिल कहते हैं, प्रधानमंत्री मोदी आने वाले समय में जब अमेरिका या किसी दूसरे राष्ट्र की यात्रा करेंगे तो इस मुद्दे पर किए जा रहे दुष्प्रचार का जवाब दे सकेंगे। संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में भी प्रधानमंत्री उन देशों का मुंह बंद कर सकते हैं, जिन्होंने 'अनुच्छेद 370' की आड़ में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। भविष्य में 'अफगानिस्तान व तालिबान' को लेकर पाकिस्तान, कश्मीर में कुछ गलत करने का प्रयास करता है तो उसके लिए पीएम मोदी और 'गुपकार' के बीच विश्वास बहाली होना बेहद जरूरी है।

केंद्र सरकार ने पांच अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से जब अनुच्छेद 370 को खत्म किया तो पाकिस्तान के अलावा घाटी के अनेक राजनीतिक दलों ने भी उसका पुरजोर विरोध किया था। इन दलों में वे सब नेता शामिल थे, जो बाद में 'गुपकार समझौते' में शामिल हो गए। भारत ने उस वक्त भी अंतरराष्ट्रीय जगत से कहा था कि यह हमारा अंदरूनी मामला है। जम्मू-कश्मीर, भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा। पांच अगस्त के बाद घाटी में अनेक नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में जब इन्हें रिहा किया गया तो उन्होंने 'गुपकार' समझौता कर मोदी सरकार की आलोचना करनी शुरू कर दी। विभिन्न देशों के सांसदों के प्रतिनिधि मंडल ने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया। इसके बावजूद 'गुपकार' समझौते में शामिल नेता, केंद्र सरकार के खिलाफ आग उगलते रहे। समीर पाटिल कहते हैं, पीएम मोदी की इस बैठक के बाद राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। गुपकार नेता भी मानते हैं कि प्रधानमंत्री ने उनकी बात गौर से सुनी है। उन्हें यह आश्वासन भी मिला है कि जल्द ही जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दे दिया जाएगा। परीसीमन प्रक्रिया पूरी होते ही वहां चुनाव कराए जाएंगे।
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