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कुलभूषण केस: ये हैं वो वकील, जिनकी पैरवी से ICJ में भारत का पक्ष मजबूत

बीबीसी Updated Thu, 18 May 2017 05:03 PM IST
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हरीश साल्वे
हरीश साल्वे - फोटो : PTI
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वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे की खूब चर्चा हो रही है। इन्होंने एक रुपये की फीस लेकर कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में भारत का पक्ष रखा। 42 साल के अपने करियर में वह कई कॉरपोरेट घरानों का पक्ष कोर्ट में रख चुके हैं। उनकी गिनती भारत के सबसे महंगे वकीलों में होती है। 'लीगली इंडिया डॉट कॉम' के मुताबिक, 2015 में साल्वे कोर्ट में एक सुनवाई के लिए 6 से 15 लाख रुपये लेते थे। पढ़िए, साल्वे की जिंदगी और करियर की खास बातें, जो किताब 'लीगल ईगल्स' से ली गई हैं:
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1- सीए की परीक्षा में दो बार फेल हुए
हरीश बचपन से इंजीनियर बनना चाहते थे। लेकिन कॉलेज तक आते-आते उनका रुझान चार्टर्ड अकाउंटेसी (सीए) की ओर हो गया। सीए की परीक्षा में वह दो बार फ़ेल हो गए। जाने माने वकील नानी अर्देशर पालखीवाला के कहने पर उन्होंने कानून की पढ़ाई शुरु की।


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नागपुर में पले बढ़े साल्वे के मुताबिक- 'मेरे दादा एक कामयाब क्रिमिनल लॉयर थे। पिता चार्टर्ड अकाउंटेंट थे। मां अम्ब्रिती साल्वे डॉक्टर थीं। इसलिए कम उम्र में ही मुझ में प्रोफेशनल गुण आ गए थे।'

2- पिता पहली बार क्रिकेट वर्ल्ड कप को इंग्लैंड से बाहर लाए
हरीश साल्वे के पिता एनकेपी साल्वे पेशे से सीए थे, लेकिन क्रिकेट प्रशासक और कांग्रेस के साथ अपनी राजनीतिक पारी के लिए ज़्यादा जाने गए। पहली बार इंग्लैंड से बाहर क्रिकेट वर्ल्ड कप कराने का श्रेय उन्हें ही दिया जाता है। उन्हीं के नाम पर बीसीसीआई ने 1995 में एनकेपी साल्वे ट्रॉफी शुरू की थी। वह इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और पीवी नरसिम्हा राव की सरकारों में मंत्री भी रहे। विदर्भ को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर भी वह काफी मुखर रहे।

3- पहला केस दिलीप कुमार का
पिता के संपर्कों का हरीश साल्वे को फ़ायदा मिला और उन्हीं की बदौलत उनकी नानी पालखीवाला से मुलाकात हुई। हरीश के मुताबिक, उनका करियर 1975 में फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार के केस के साथ शुरू हुआ। हरीश इस केस में अपने पिता की मदद कर रहे थे।

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दिलीप कुमार पर काला धन रखने के आरोप लगे थे। आयकर विभाग ने उन्हें नोटिस भेजा था और बकाया टैक्स के साथ भारी हर्जाना भी मांगा था। मामला ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।

अपने शर्मीले दिनों को याद करते हुए साल्वे कहते हैं, 'मैं सुप्रीम कोर्ट में दिलीप कुमार का वकील था। आयकर विभाग की अपील खारिज करने में जजों को कुल 45 सेकेंड लगे। दिलीप कुमार एक पारिवारिक मित्र थे। वह बहुत खुश हुए। मुझे कोर्ट में बहस करनी पड़ती तो मेरी आवाज नहीं फूटती। खुशकिस्मती से कोर्ट ने मुझसे जिरह के लिए नहीं कहा।'
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