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इस काल भैरव जयंती पर कालभैरव मंदिर (दिल्ली) में पूजा और प्रसाद अर्पण से बनेगी बिगड़ी बात : 19-नवंबर-2019
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इस काल भैरव जयंती पर कालभैरव मंदिर (दिल्ली) में पूजा और प्रसाद अर्पण से बनेगी बिगड़ी बात : 19-नवंबर-2019

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हिमाचल प्रदेश

मंगलवार, 12 नवंबर 2019

हिमाचल: कुंजड़ी मल्हार को प्रसिद्धि दिलाने वाले लोक कलाकार घर में उपेक्षा का शिकार

उड़ा ओ मेरी ओ कुंजड़ी ओ बर सा दिहाडे मेरे रामा जिंदेया रे मेले सावन की झम-झम बूंदों के दौरान कुंज (सफेद हंस) के आगमन पर गाए जाने वाला ये गीत देश, प्रदेश और जिले में काफी प्रसिद्ध हैं। चंबा में भट्ट वंश कुंजडी मल्हार के गायन की परंपरा को बखूबी निभा रहा है। वर्तमान में मशहूर लोक गायक अजीत भट्ट इसके लिए प्रयासरत हैं। लेकिन, कुंजड़ी मल्हार की विरासत को सहेजने के लिए अजीत भट्ट को अभी तक सरकार, प्रशासन और संबंधित विभाग की नजर-ए- इनायत नहीं हो रही है।

अजीत भट्ट ने बताया कि चंबा में तत्कालीन जिलाधीश रही एम. सुधा देवी की ओर से कुंजड़ी मल्हार की प्रस्तुति को लेकर मिंजर मेले के दौरान एक रिकॉर्ड बनाने की तैयारी थी। एक साथ तीन हजार बच्चों की ओर से कुंजडी मल्हार की प्रस्तुति दी जानी थी। इसके लिए विभिन्न शिक्षण संस्थानों, स्कूलों में बच्चों को एक माह तक तैयारी भी करवाई गई थी। इसी बीच देश के राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के निधन के चलते मिंजर मेले के दौरान होने वाली इस प्रस्तुति को रद्द कर दिया गया।

इसके बाद आज तक इस दिशा में पुन: कोई प्रयास तक नहीं हो पाए हैं। अजीत भट्ट के मुताबिक मिंजर विसर्जन से पूर्व मंजरी गार्डन में मुख्यमंत्री, विधायकों के समक्ष कुंजड़ी मल्हार की प्रस्तुति इसी आस में दी जाती है कि इसके उत्थान के लिए प्रयास किए जाएं। लेकिन, आज तक आश्वासन ही मिले हैं। अजीत भट्ट ने बताया कि कुंजडी मल्हार 80 वर्ष पहले से चंबा रियासत में गाया जाता आ रहा है।

उनके ताया सरदार प्रेम सिंह भट्ट से उन्होंने इसकी तालिम ली। 21 वर्ष की आयु में उन्हें कुंजडी मल्हार की प्रस्तुति देने का मौका मिंजर मेले के मंच पर मिला।इसके बाद विभिन्न मंचों पर कुंजडी मल्हार की प्रस्तुति दी। भाषा और संस्कृति विभाग की ओर से नार्थ जोन सिंगिंग प्रतियोगिता में उन्हें अपनी संस्कृति, अपनी विरासत लोगों के सामने रखने का मौका मिला। अजीत भट्ट ने कहा कि यदि संबंधित विभाग, प्रशासन कुंजडी मल्हार की लुप्त हो रही विरासत को सहेजने के लिए प्रयास करने चाहिए। 
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हिमाचल को नशा मुक्त बनाने में सभी करें सहयोग: राज्यपाल

शिमला जिले के रामपुर में अंतरराष्ट्रीय लवी मेले के शुभारंभ पर राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि राज्य के लोग पारंपरिक उत्सवों को बड़े ही उत्साह के साथ मनाते हैं। इससे यहां की समृद्ध संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं की झलक दिखती है। हिमाचल को नशा मुक्त बनाने में सभी लोगों का सहयोग होना जरूरी है।

युवा पीढ़ी को इसके बुरे प्रभावों से बचाने के लिए अधिक से अधिक एनजीओ को शामिल करके एक बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जाना चाहिए। प्रदेश सरकार नशे को लेकर गंभीर है और समूचे प्रदेश को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया है।

उन्होंने अपने संबोधन में युवाओं को नशे से दूर रहने का आह्वान किया। प्रदेश सरकार से नशे के खिलाफ सख्त से सख्त कदम उठाने की मांग की, ताकि प्रदेश में किसी प्रकार की नशे से युवा पीढ़ी बर्बाद न हो। 

उन्होंने राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों से सरकार की इस योजना का पूरा लाभ उठाने का आग्रह किया। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को भी और गति देने के लिए कहा। लवी मेले का अपना ऐतिहासिक महत्व है। यह न केवल व्यापारिक गतिविधियों के लिए बल्कि पुरानी परंपराओं के लिए भी प्रसिद्ध है।

इस तरह के मेलों से ग्रामीण स्तर तक स्वरोजगार के अवसर मिलते हैं। यह मेला सदियों से भारत और तिब्बत के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापार मेला रहा है। आज भी यह परंपरा उतनी ही जीवंत है जितनी तब थी।

चामुर्थी घोड़ों की बिक्री के लिए यह मेला जाना जाता है। राज्यपाल ने किन्नौरी बाजार का भी उद्घाटन किया और विभिन्न सरकारी विभागों और अन्य संगठनों की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी में गहरी दिलचस्पी दिखाई। 
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मानवाधिकार आयोग पहुंचा वृद्ध महिला से क्रूरता मामला, राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी लिया संज्ञान

हिमाचल के मंडी में सुरक्षित नहीं आधी आबादी, महिला थाने में सबसे ज्यादा मुकदमे

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गृह जिले छोटी काशी में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। इस बात की तस्दीक महिलाओं की सुविधा के लिए खोले महिला थाने कर रहे हैं। प्रदेश में जिला मंडी, बिलासपुर, चंबा, हमीरपुर, कांगड़ा, कुल्लू, शिमला, सिरमौर, सोलन, बद्दी, ऊना समेत 11 महिला थाने चल रहे हैं। लेकिन, महिला अत्याचार के सबसे अधिक 97 मुकदमे मंडी जिले में दर्ज हैं।

जनवरी, 2018 से 31 जुलाई, 2019 तक मंडी जिले के महिला पुलिस थाने में दुष्कर्म के 17, अपहरण के 6, महिला उत्पीड़न के 34, लज्जा भंग करने और छेड़छाड़ के 15, आईटी और अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में 2-2 और अन्य विभिन्न धाराओं में कुल 97 मामले दर्ज हैं।
  मंडी जिले के सरकाघाट थाने के अंतर्गत बुजुर्ग महिला के मुंह में कालिख पोतने और जूतों की माला पहनाकर सड़क पर घसीटने से दुनिया भर में देवभूमि शर्मसार हुई है।

91 मुकदमों के साथ सोलन जिले का बद्दी महिला थाना प्रदेश में दूसरे नंबर पर है। बद्दी में महिला अत्याचार के अधिक मामले दर्ज होने के पीछे एक बड़ी वजह औद्योगिक क्षेत्र है। जहां पर हजारों की संख्या में महिलाएं विभिन्न उद्योगों में काम कर रही हैं। वहीं, प्रवासी लोगों की संख्या भी इस महिला थाना के अंतर्गत अधिक है। जिसके चलते यहां पर दुष्कर्म के 33 और अपहरण के 27 मुकदमे दर्ज हैं। प्रदेश में सबसे कम मामले चंबा जिले में दर्ज हैं। 
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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

वृद्ध महिला के साथ क्रूरता मामले में दिवंगत गूर की बेटी ही निकली सूत्रधार, जांच में बड़ा खुलासा

हिमाचल के मंडी में वृद्ध महिला के चेहरे पर कालिख पोतने और जूतों का हार पहनाकर पूरे गांव में घुमाने के प्रकरण का सूत्रधार कोई और नहीं बल्कि मूल माहूनांग (सरकाघाट की गाहर पंचायत का बैरा इलाका) के दिवंगत गूर की 22 वर्षीय बेटी निकली। देव आस्था के नाम पर यह कारनामा इसलिए किया गया, क्योंकि अंधविश्वासी और रूढ़िवादी सोच यह नहीं चाहती थी कि क्षेत्र में उनके देवता के सिवाय किसी और देवता का पूजन हो, जिससे बरसों से चली आ रही उनकी प्रभुसत्ता और कमाई कम हो।

पुलिस के दावों के अनुसार इसी सोच को लेकर बुजुर्ग महिला के साथ क्रूरता हुई।  वृद्धा अपने घर में किसी अन्य नागदेवता की पूजा करती थी। ये मूल माहूंनाग के नाम पर दुकानदारी चलाने और उनके प्रति अंधविश्वासी आस्था रखने वालों को बर्दाश्त नहीं था। आरोप है कि गूर की बेटी ने ऐसे अंधविश्वासी ग्रामीणों, कार कारिंदों के साथ षड्यंत्र रचा और जादू-टोने के नाम पर बुजुर्ग महिला को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

दबदबा कायम रखने के लिए महिला के साथ क्रूरता की। इससे न केवल देव समाज का नाम बदनाम हुआ है, बल्कि देवभूमि के नाम से हिमाचल की पहचान भी दागदार हुई है। उधर, अंधविश्वासियों पर शिकंजा कसे जाने के बाद देव आस्था के नाम पर प्रताड़ित ग्रामीण अब खुलकर सामने आने लगे हैं। सोमवार को एक सेवानिवृत्त शिक्षक ने पुलिस में इस संदर्भ में शिकायत की है। पुलिस ने शिकायत के बाद मामले में आरोपियों पर एक और एफआईआर दर्ज कर ली है।
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हिमाचल में पहली बार गाड़ियों के वीआईपी नंबरों की होगी ई-नीलामी

हिमाचल में पहली बार गाड़ियों के वीआईपी और पसंद के नंबरों की ई-नीलामी होगी। परिवहन विभाग में नीलामी में गड़बड़ी की आशंका की वजह से पारदर्शिता के लिए सरकार ने यह व्यवस्था की है। लोगों से एक सप्ताह के भीतर आपत्ति और सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद यह व्यवस्था लागू मानी जाएगी। सोमवार को प्रदेश सरकार ने इसकी अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित कर दी है।  0001 नंबर सरकारी वाहनों के लिए आरक्षित रहेगा। इसके लिए एक लाख रुपये तक की रजिस्ट्रेशन फीस तय की गई है। 0002 से 0010 के लिए 75 हजार रुपये न्यूनतम फीस निर्धारित की गई है।

इनकी ई-नीलामी होगी। इसके अलावा 0011 से 0100 तक न्यूनतम फीस 50 हजार रुपये और इसकी भी ई -नीलामी होगी। 0101, 0111,0123,0200,0202, 0222, 0234, 0251, 0300,0303, 0333,0345, 0400,0404, 0444, 0456, 0500,0501,0505, 0555,0567,0600, 0606, 0666, 0678, 0700, 0707, 0777, 0786, 0789, 0800,0808, 0888, 0900, 0909, 0999, 1000, 1111, 2000, 2222, 3000, 3333, 4444, 5000, 5555, 6666, 7000, 7777, 8000, 8888, 9000 और 9999 के लिए न्यूनतम फीस 15000 रुपये रखी है। इन नंबरों की भी ई-नीलामी होगी। अन्य पसंद के नंबरों के लिए न्यूनतम फीस 10,000 रुपये रखी गई है। इनकी भी ई-नीलामी होगी। 
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मंडी मामला: हिमाचल में मानवाधिकार आयोग होता तो पहले हो जाती कार्रवाई

हाईकोर्ट की सख्त नाराजगी झेल रही प्रदेश सरकार के नकारात्मक रवैये के चलते एक बार फिर राज्य मानवाधिकार आयोग की कमी महसूस हो रही है। मंडी के सरकाघाट में एक बुजुर्ग महिला से बदसलूकी की गई। घटना का वीडियो बनाकर उसे वायरल भी कर दिया गया। 7 नवंबर से पहले की घटना का वीडियो हिमाचल से लेकर देश दुनिया में भी वायरल होता रहा लेकिन, पुलिस आंख बंद कर बैठी रही।

खास बात यह है कि ऐसा तब हुआ जब अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आने के चलते पुलिस दावा कर रही थी कि वह सोशल मीडिया पर नजर रखे हुए है। तमाम दावों के बीच सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होता रहा। वृद्धा से मारपीट और दुर्व्यवहार के मामले को जब अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तब पुलिस की नींद टूटी। 10 नवंबर को एक के बाद एक कई गिरफ्तारी कर डाली।

लेकिन, सवाल यह है कि जब घटना सामने आ गई तो पुलिस अगले चार दिन तक वृद्धा मारपीट मामले में मानवाधिकार के खुले उल्लंघन पर भी चुप क्यों बैठी रही। प्रदेश में अगर राज्य मानवाधिकार आयोग होता तो पुलिस की कार्रवाई पहले ही हो जाती। सूत्रों की मानें तो मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अलावा केंद्र सरकार तक प्रदेश सरकार को राज्य में मानवाधिकार आयोग के गठन के लिए एक के बाद एक कई रिमांडर पत्र लिख चुकी है। लेकिन, राज्य सरकार कान बंद कर के बैठी है। 
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हिमाचल: किन्नौरी सेब के दाम 50 फीसदी गिरे, बागवान निराश, ये है बड़ी वजह

किन्नौरी सेब को इस सीजन में अच्छे रेट नहीं मिल रहे। मार्केट में गिरावट के कारण बागवानों को अपनी उपज औने पौने दामों में बेचनी पड़ रही है। किन्नौरी सेब को अधिकतम 1100 रुपये प्रति पेटी रेट मिल रहे हैं। किन्नौर का सेब दिल्ली, चंडीगढ़, परवाणू और नारकंडा में बिकता है। किन्नौर की पांगी पंचायत के पूर्व प्रधान मानचंद नेगी ने बताया कि इस बार पिछले साल के मुकाबले बागवानों को आधे ही रेट मिले हैं।

इससे बागवान निराश हैं। कल्पा के भूपेंद्र सिंह का कहना है कि इस सीजन में किन्नौरी सेब की डिमांड कम है, जिसकी वजह से रेट भी नहीं मिल पा रहे हैं। कल्पा शुद्धरंग के बागवान कुलवंत नेगी ने बताया कि हर साल मार्केट में किन्नौरी सेब की डिमांड रहती थी। लोग मार्केट में किन्नौरी सेब ढूंढते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। सांगला पंचायत के प्रधान सचिन नेगी का कहना है कि अधिकतर किन्नौरी सेब मार्केट में पहुंच चुका है।

ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अब बहुत कम फसल बची है। फसल के अच्छे रेट न मिलने से बागवान मायूस हैं। अधिकतर कोल्ड स्टोर पहले ही फुल हो चुके हैं, जिसके चलते अब किन्नौरी सेब को स्टोर करने की जगह नहीं मिल पा रही। स्टोरेज न होने की स्थिति में किन्नौरी सेब के जल्द खराब होने का खतरा है। इसलिए खरीदार किन्नौरी सेब खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे।
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सूरजकुंड क्राफ्ट मेले के लिए थीम स्टेट बना हिमाचल

हिमाचल की चोटियों पर फिर बर्फबारी, ठंड का प्रकोप बढ़ा, इतने दिन खराब रहेगा मौसम

वृद्ध महिला से क्रूरता मामले में हाईकोर्ट ने हिमाचल सरकार से तलब की रिपोर्ट

सरकाघाट की गाहर पंचायत में वृद्ध महिला से क्रूरता का मामला हिमाचल हाईकोर्ट पहुंच गया है। प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एल नारायण स्वामी और न्यायाधीश ज्योत्सना रेवाल दुआ की खंडपीठ ने भी अमर उजाला सहित अन्य समाचार पत्रों में छपी खबरों पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से एक सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है। 

क्या है मामला 
नौ नवंबर को सरकाघाट की गाहर पंचायत में ग्रामीणों ने एक बुजुर्ग महिला पर जादूटोना करने और डायन होने का आरोप लगाते हुए उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया। महिला के बाल काटे, उसके चेहरे पर कालिख पोती और गले में जूतों की माला पहनाकर देवता के रथ के आगे घसीटा गया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझा।  इसी बीच सीएम जयराम ने भी मामले की जांच के आदेश दिए।
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विशेषज्ञ की सलाह: मटर में विल्ट की रोकथाम के लिए बीज को करें उपचारित

हिमाचल भर के विभिन्न जिलों में लहसुन सहित मटर की बिजाई की जाती है। इसमें कई प्रकार की बीमारी भी लग जाती है। जिसके लिए नौणी विवि ने किसानों को लहसुन की निराई-गुड़ाई और हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है। नौणी विवि के पर्यावरण विभाग अध्यक्ष डॉ. सतीश भारद्वाज ने कहा कि पालक, मूली और शलगम आदि की बिजाई पूरी कर इसमें खाद डालें। इसके अलावा मटर में विल्ट की रोकथाम के लिए बीज की बीजाई से पूर्व बाविस्टिन 0.5 ग्राम लीटर पानी में 2 घंटे उपचारित करने के बाद बीजाई करें।

प्याज की तैयार पनीरी को खेत में रोपाई करें। इसके अलावा सेब व अन्य शर्द कालीन फल पौधों के रोपण के लिए गडढ़ा तैयार करके उसमें सड़ी गोबर खाद 500 ग्राम सुपर फास्फेट 50 मिली मासबन प्रति लीटर पानी प्रति गड्ढे  में डालें। पौधों
के तौलियों में नमी को संरक्षित करने के लिए घास की मोटी तह के रुप में मल्च बिछाएं। शीतोष्ण फलों की पौधशाला में समय-समय पर सिंचाई करें। गड्ढों की खुदाई का कार्य पूरा करने के बाद गड्ढों को भरना शुरू कर दें। 
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गायिका गीता भारद्वाज के गीत को मुख्यमंत्री की पत्नी ने भी गुनगुनाया, पढ़ें पूरा मामला

हिमाचल के सोलन जिले के कंडाघाट में रेडक्रॉस मेले के साथ सांस्कृतिक संध्या का आगाज हिमाचल की विख्यात गायिका गीता भारद्वाज की प्रस्तुतियों से हुआ। चंद अल्फाजों के साथ सीएम की पत्नी डॉ. साधना ठाकुर ने भी गीता भारद्वाज के साथ गीतों को अपनी आवाज दी। उन्होंने मेले के आयोजन के लिए रेडक्रॉस समिति कंडाघाट को अपनी शुभकामनाएं दीं।

रेडक्रॉस मेले की प्रथम सांस्कृतिक संध्या में सात वर्षीय शिवांगी के नृत्य को खूब सराहा गया। इस अवसर पर डॉ. राजेश कश्यप, जिला परिषद सदस्य शीला, रितु सेठी, लोकेश्वर शर्मा, मदन ठाकुर, देवेंद्र वर्मा, उपमंडलाधिकारी एवं उपमंडलस्तरीय रेडक्रॉस समिति के अध्यक्ष डॉ. संजीव धीमान, तहसीलदार कंडाघाट एवं रेडक्रॉस समिति के सचिव ओपी मेहता, विभिन्न पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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