पुस्तकालयों में दीमक चाट रही किताबें

मैहतपुर (ऊना)/ब्यूरो Updated Sat, 03 Nov 2012 03:52 PM IST
libraries is not working in schools
सरकारी स्कूलों के पुस्तकालय महज कागजों में ही चल रहे हैं। खरीदी गई बेहद महंगी किताबें ट्रंकों, अलमारियों में रखी जाती हैं। ऐसे पुस्तकालयों का क्या लाभ जहां किताबों का अध्ययन करने के लिए न तो माहौल है, न उचित भवन और न ही बैठने लायक फर्नीचर।

प्राथमिक, मिडिल एवं सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के लिए सरकार उनके स्तर के मुताबिक हर साल धन मुहैया जरूर करवाया जा रहा है ताकि स्कूलों में पुस्तकालयों का रख रखाव सही ढंग से हो सके। हैरत की बात यह कि ज्यादातर स्कूलों के पुस्तकालयों में पड़ी किताबों को दीमक चाट रही हैं। बहुत से स्कूलों में तो लाईब्रेरियन के पद ही नहीं है, जहां हैं वहां लाईब्रेरियन नहीं। शिक्षकों के पास चार्ज देकर काम चलने की रस्म निभाई जा रही है।

शिक्षक छात्रों को पढ़ाएं कि पुस्तकालय चलाएं, यह उनके समक्ष समस्या खड़ी है। बसदेहड़ा स्कूल के एसएमसी के पूर्व प्रधान धर्मवीर गोगी तथा राजकुमार धीमान की मानें तो जो पैसा पुस्तकालयों के लिए आता है वह पर्याप्त नहीं होता। डाइट के प्रिंसिपल जेआर कौशल ने कहा कि सभी स्कूलों के पुस्तकालयों के लिए धन मुहैया करवाया जा रहा है। जो डाटा मंगवाया जाता है उनके मुताबिक सभी स्कूलों में पुस्तकालय चल कर रहे हैं।

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