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महिला सशक्तीकरण के लिए तोड़ें चुप्पी : गौरव

Shimla	 Bureauशिमला ब्यूरो Updated Tue, 21 Jan 2020 10:42 PM IST
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अम्बेहड़ा स्कूल में अपराजिता कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को जागरूक करते एसएचओ अंब गौरव भारद्वा?
अम्बेहड़ा स्कूल में अपराजिता कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को जागरूक करते एसएचओ अंब गौरव भारद्वा? - फोटो : Una
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ऊना। अंब थाना प्रभारी इंस्पेक्टर गौरव भारद्वाज ने छात्राओं से आह्वान किया कि अपराध के खिलाफ खुलकर बोलें। उन्होंने कहा कि जिस दिन आप अपनी चुप्पी तोड़ेंगी, महिला सशक्तीकरण स्वत: ही हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी सोच जितनी प्रखर होगी, उतने ही बेहतर समाज का निर्माण होगा। गौरव भारद्वाज मंगलवार को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला अंबेहड़ा धीरज में अमर उजाला की ओर से आयोजित अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे।
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उन्होंने लैंगिक भेदभाव और संवेदीकरण जैसे मुद्दे पर बताया कि हम बच्चे के पैदा होते ही भेदभाव शुरू कर देते हैं। यह जरूरी नहीं कि बेटियों को गुड़िया और किचन सेट जैसे खिलौने ही दिए जाएं। उन्हें वे सब खिलौने दिए जाने चाहिए जो लड़कों को दिए जाते हैं। अन्यथा बेटियां खुद को कमजोर महसूस करती हैं। उन्होंने कहा कि हमेशा अपने मोबाइल में पुलिस थाने का नंबर ट्रिपल ए के नाम से सेव करना चाहिए, ताकि आपात स्थिति में वह नंबर फोनबुक पर सबसे ऊपर दिखे। इस मौके पर प्रधानाचार्य बख्शीश सिंह और संजीव कुमार मौजूद रहे।
छात्राओं ने पूछे सवाल
लड़कों को जागरूक करना आवश्यक : स्मृति
छात्रा स्मृति ने अपराजिता कार्यक्रम की सराहना करते हुए सुझाव दिया कि लड़कों को भी ऐसे मामलों में जागरूक करना आवश्यक है। ताकि उन्हें भी समाज में महिलाओं के सम्मान का बोध हो सके।
आईपीएस बनने की क्या है प्रक्रिया : निष्ठा
छात्रा निष्ठा ने आईपीएस बनने की पूरी प्रक्रिया के बारे में पूछा। इंस्पेक्टर गौरव भारद्वाज ने बताया कि ग्रेजुएशन के बाद कुल 38 विषयों में दो का चयन कर इसकी तैयारी की जा सकती है। उन्होंने आईएफएस, आईएस व आईपीएस की पूरी प्रक्रिया के बारे मेें बताया।
लड़कियों पर इतना प्रतिबंध क्यों : अंकिता
अंकिता ने सवाल किया कि लड़कियों पर बहुत सारे प्रतिबंध क्यों लगाए जाते हैं। एसएचओ गौरव चौधरी ने कहा कि कानून सबको अभिव्यक्ति की आजादी देता है। खुलकर जीओ, लेकिन हमें अपनी सीमाएं मालूम होनी चाहिए।
पुरुष संरक्षक की जगह बन रहे भक्षक : श्रुति
छात्रा श्रुति ने कहा कि सामाजिक व्यवस्था के मुताबिक पुरुषों को महिलाओं के संरक्षक के रूप में देखा जाता है। लेकिन, आजकल पुरुष ही महिलाओं पर अत्याचार कर रहे हैं। इंस्पेक्टर गौरव भारद्वाज ने कहा कि हमें दूसरों पर आश्रित होने की सोच को बदलना होगा तभी बदलाव संभव है।
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