80 फीसदी नवजात शिशुओं में पीलिया

Una Updated Thu, 20 Dec 2012 05:30 AM IST
ऊना। इन दिनों जन्म ले रहे अधितकर शिशु पीलिया की चपेट में आ रहे हैं। इनमें गर्भावस्था के नौ माह पूरे करने के बाद (टर्म डिलीवरी) जन्म लेने वाले 60 फीसदी शिशु पीलिया के शिकंजे में आ रहे हैं। जबकि निर्धारित समय पूर्व (प्री टर्म) डिलीवरी वाले 80 फीसदी शिशुओं में पीलिया के लक्षण पाए जा रहे हैं। कुल मिलाकर हर तीसरे बच्चे को यह रोग अपनी चपेट में रहा है। यदि इसका समय पर उपचार न किया जाए तो यह दिमाग तक पहुंच सकता है, जो बच्चों को मानसिक विकलांग तक कर देता है। चिकित्सकों के अनुसार जन्म के समय बच्चों में खून अधिक होता है, लेकिन जन्म लेने के बाद यह सूखता है तो उनमें पीलिया रोग हो जाता है। शिशुओं में हो रहे पीलिया के मामलों से अभिभावकों की भी चिंताएं बढ़ रही हैं।
इस रोग का लेवल के आधार पर इलाज किया जाता है। जिसके दो चरण अहम हैं। जिसमें एक फोटो थैरेपी है, जबकि दूसरा खून बदलना। क्षेत्रीय अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डा. रवि शर्मा का कहना है कि पीलिया को समाप्त करने का पहला अहम चरण फोटो थैरेपी है। जिसके लिए शिशुओं को विशेष रोशनी के लिए फोटो थैरेपी की मशीन में रखा जाता है। जिससे पीलिया टूट कर उनके मल के रास्ते शरीर से बाहर हो जाता है। लेकिन, कई बार इस मशीन में भी पीलिया का क्रम टूटता नहीं है। जिसके चलते उनका खून तक बदलना पड़ जाता है। यदि पीलिया दिमाग तक पहुंच जाए तो यह बडे़ होने पर बच्चों को मानसिक विकलांग कर देता है। डा. रवि शर्मा ने बताया कि ऊना में अभी तक चार बार शिशुओं का खून बदला जा चुका है। जिसमें एक ही शिशु का दो बार खून बदला गया था। उन्होंने बताया कि बच्चों को पीलिया होने की स्थिति में इसे हल्के से कतई न लेें। जल्द ही इस संदर्भ में चिकित्सक की राय लें।

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