अनदेखी को लेकर जाट कल्याण परिषद लाल

Una Updated Tue, 27 Nov 2012 12:00 PM IST
मैहतपुर (ऊना)। हिमाचल के जाटों को केंद्रीय सूची में शामिल न करके नेताओं ने उनसे जो विश्वासघात किया है, वक्त आने पर प्रदेश का जाट वर्ग इसका करारा जवाब देगा। जाट कल्याण परिषद हिमाचल प्रदेश के नेताओं का कहना है कि वह अपनी इस मांग को लेकर लंबे अरसे से विभिन्न सियासी दलों के नेताओं से मिलते रहे हैं, लेकिन किसी ने भी उनकी इस मांग को पूरा करवाने में सहयोग नहीं किया है।
प्रदेश जाट कल्याण परिषद के प्रदेशाध्यक्ष तरसेम चौधरी, महासचिव बलतेज इंद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश में जाट समुदाय की आबादी 1 लाख 32 हजार के करीब होने के बावजूद इस वर्ग को केंद्रीय ओबीसी सूची में शुमार न किया जाना, इस वर्ग से भेदभाव का सबूत है। बलतेज इंद्रसिंह ने सवाल उठाया कि जब सैणी समुदाय को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल किया जा सकता है तो जाटों को क्यों नहीं? अगर जाट समुदाय को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल नहीं किया जा सकता तो प्रदेश के समस्त जाटों को पंजाब में शिफ्ट कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि 1978 में गठित जाट कल्याण परिषद ने सन 2000 में साहिब सिंह वर्मा के प्रयासों के सदका प्रदेश के जाटों को हिमाचल में ओबीसी वर्ग में शामिल किया गया था, लेकिन केंद्रीय सूची में आज दिन तक शामिल नहीं किया जा सका है। इसी कारण शिक्षा के क्षेत्र में पिछडे़ इस वर्ग को अनेक चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है। परिषद के नेताओं ने कहा कि प्रदेश में जाट वर्ग को अल्पसंख्यक वर्ग में शामिल किया जाए ताकि इस समुदाय को भी उनके हक हकूक सही ढंग से मिल सकें। परिषद के महामंत्री बलतेज इंद्र सिंह ने कहा कि अब भी इस मामले में अनदेखी की गई तो जाट कल्यण परिषद को प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ने को मजबूर होना पड़ेगा।

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