चार सीटों पर आमने-सामने की टक्कर

Una Updated Sun, 04 Nov 2012 12:00 PM IST
ऊना। चुनाव प्रचार के शुरुआती दौर से लेकर प्रचार थम जाने तक विभिन्न हलकों में समीकरण भी बदल गए। जिला ऊना की पांच में से चार सीटों कुटलैहड़, चिंतपूर्णी, हरोली और ऊना सदर में भाजपा और कांग्रेस के बीच आमने-सामने की टक्कर देखी जा रही है। गगरेट हलके में तिकोने मुक ाबले के हालात बने हुए हैं। चुनावी शोर में कुछ प्रत्याशियों के वोटों का ग्राफ गिरा तो कइयाें ने खुद को और मजबूत किया। गगरेट में कांग्रेस प्रत्याशी राकेश कालिया, भाजपा प्रत्याशी सुशील कालिया, कांग्रेस से बागी रमन जसवाल और भाजपा से बागी लक्ष्मी जरियाल समेत दस प्रत्याशी मैदान में हैं। यहां स्थानीय व्यक्ति को टिकट के लिए ही भाजपा कांग्रेस में खासी खींचतान हुई थी। कांग्रेस में राकेश कालिया के विरोध में गगरेट कांग्रेस एकता मंच बना। भाजपा टिकट की प्रेफरेंस आर्डर की लिस्ट से ही गगरेट भाजपा में भी खासा हंगामा हुआ। कांग्रेस टिकट के 28 आवेदकों में दो दर्जन से ज्यादा टिकटार्थी मंच से रहे। चिंतपूर्णी के विधायक राकेश कालिया को गगरेट से कांग्रेस टिकट मिलने के बाद मंच से रमन जसवाल मैदान में डटे रहे जबकि, अन्यों ने नाम वापस ले लिया। नाम वापस लेने वाले मंच के अधिकतर टिकटार्थियों ने रमन के पक्ष में खुले तौर पर प्रचार भी किया है। भाजपा-कांग्रेस प्रत्याशियों के अलावा रमन को भी हलके में बागियों और अन्य प्रत्याशियों के मुकाबले भारी आंका जा रहा है। कुटलैहड़ में भाजपा के वीरेंद्र कंवर और राम दास मलांगड़ के बीच मुकाबला देखा जा रहा है। चिंतपूर्णी में भाजपा के बलवीर और कांग्रेस के कुलदीप कुमार के बीच जंग के आसार हैं। हरोली में कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश अग्निहोत्री और भाजपा प्रत्याशी राम कुमार के बीच मुकाबला देखा जा रहा है। ऊना सदर में भाजपा अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती और कांग्रेस प्रत्याशी सतपाल सिंह रायजादा में टक्कर देखी जा रही है। ऊना सदर में टीएमसी प्रत्याशी एवं पूर्व विधायक ओपी रतन और सीपीआईएम उम्मीदवार गुरनाम भी हार जीत के अंतर को खासा प्रभावित कर सकते हैं। कुटलैहड़, चिंतपूर्णी और हरोली में भी अन्य राजनीतिक दलों के प्रत्याशी, आजाद तथा बागी भाजपा-कांग्रेस के बीच हार जीत के अंतर पर असर डालने के प्रयास में हैं।

ये हैं नए चेहरे
हरोली से भाजपा के प्रत्याशी राम कुमार, ऊना सदर से कांग्रेस प्रत्याशी सतपाल सिंह रायजादा, गगरेट से भाजपा के सुशील कुमार कालिया नए चेहरे हैं। कांग्रेस और भाजपा जैसे दो प्रमुख दलों से यह तीनों पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं।

एक बार जीता है आजाद प्रत्याशी
ऊना जिले के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों की जनता ने आजाद प्रत्याशियों को विधानसभा नहीं पहुंचाया है। 1993 में महज एक बार चिंतपूर्णी से कांग्रेस से बागी हरिदत्त को जीत मिली थी। बाद में हरिदत्त कांग्रेस के एसोसिएट विधायक बने।

ओपी रतन हिविकां से लड़ चुके हैं चुनाव
कांग्रेस से बागी एवं ऊना सदर से टीएमसी प्रत्याशी ओपी रतन मैदान में है। रतन ने 1998 में भी कांग्रेस से बगावत करके हिविकां से चुनाव लड़ा था। 1998 में कांग्रेस टिकट वीरेंद्र गौतम को मिलने से नाराज रतन हिविकां के टिकट पर मैदान में उतरे थे। हालांकि, हलके में जीत कांग्रेस प्रत्याशी वीरेंद्र गौतम की हुई थी। 1998 में कांग्रेस के वीरेंद्र गौतम को 18201, भाजपा के सुभाष सहोड़ को 12427 और हिविकां प्रत्याशी ओपी रतन को 12283 मत पड़े थे।

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