मांगों को लेकर तल्ख होमगार्ड्स के तेवर

Una Updated Tue, 24 Jul 2012 12:00 PM IST
ऊना। प्रदेश सरकार ने यदि एक सप्ताह के भीतर होमगार्ड जवानों के लिए कोई स्थाई नीति बनाकर लागू नहीं की तो इसके परिणाम सरकार को आने वाले विधानसभा चुनावों में भुगतने पडे़ंगे। यह ऐलान हिमाचल होमगार्ड कल्याणकारी संगठन के राज्य प्रवक्ता मुकेश जसवाल ने किया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार होमगार्ड जवानों के हितों को लेकर गंभीर नहीं है। सरकार ने अपने सत्ता के साढ़े चार वर्षों में होमगार्ड जवानों के लिए आयु व शैक्षणिक योग्यता के आधार पर विभिन्न विभागों में समायोजित करने की कोई विशेष नीति नहीं बनाई है। इस कारण प्रदेश के आठ हजार होमगार्ड जवानों में सरकार के विरुद्ध रोष उग्र होता जा रहा है। जवानों के हितों को सुरक्षित करने के लिए कई बार मामला सरकार के समक्ष उठाया जा चुका है। लेकिन हर बार आश्वासन ही मिले हैं।
संघ ने बताया कि प्रदेश में 6 दिसंबर 1962 से लेकर अब तक होमगार्ड जवान राज्य में कानून व शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 24 घंटे निष्काम सेवाएं दे रहे हैं। पंजाब में होमगार्ड जवानों को 350 रुपए पारिश्रमिक प्रतिदिन दिया जा रहा है व पांच प्रतिशत की वार्षिक बढ़ोतरी भी की गई है। जवानों के लिए निशुल्क बस सेवा का प्रावधान करके जवानों के हितों को राहत पहुंचाई गई है।
संघ के प्रवक्ता ने कहा कि हिमाचल सरकार ने अपने सत्ता शासन में होमगार्ड जवानों को नियमित नियम आधार बनाने के लिए कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई है। कई बार आवाज बुलंद करने के बावजूद भी पंजाब की तर्ज पर जवानों को मिलने वाली पारिश्रमिकी व अन्य सुविधाएं नहीं दी गई हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि प्रदेश सरकार ने होमगार्ड जवानों के हितों को राहत देने के लिए कोई नीति एक सप्ताह में लागू नहीं की, तो जवानों के साथ किए गए खिलवाड़ की भरपाई सरकार को आने वाले मिशन रिपीट के समय भुगतनी पड़ेगी।

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