साइकिल पोलो ने दिलाई विश्व में पहचान

Una Updated Thu, 28 Jun 2012 12:00 PM IST
ऊना। बेशक देश में साइकिल पोलो खेल को बहुत कम युवा पसंद करते हों, लेकिन इस खेल का विदेशों में काफी प्रचलन है। वहां युवा ही नहीं, बल्कि अधेड़ भी इस खेल में काफी रुचि दिखाते हैं। इस खेल से न केवल शारीरिक चुस्ती और ताजगी मिलती है, बल्कि यह खेल सस्ता भी है। साइकिल पोलो प्रशिक्षण के लिए ऊना आए अंतरराष्ट्रीय कोच डा. एमएस दरदी ने बताया कि 1977 में अपने चार प्रमुख साथियों के साथ इस खेल का आगाज किया था। अपने अनुभव के आधार पर डा. दरदी कहते हैं कि प्रदेश सरकार इस खेल को हिमाचल में प्रोत्साहन दे तो युवाओं के लिए यह खेल बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। 25-26 जून को प्रशिक्षण पाने वाले तकरीबन सवा सौ छात्रों को डा. दरदी ने प्रदेश साइकिल पोलो संघ के सचिव मुनीश राणा के साथ इस खेल की बारीकियों से अवगत करवाया। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि हालांकि इस खेल को आगामी खेल टूर्नामेंट में शामिल करने की बात प्रदेश सरकार ने मान ली है और उम्मीद की जानी चाहिए कि आगामी स्कूली खेलकूद प्रतियोगिताओं में साइकिल पोलो खेल न केवल छात्रों के लिए दिलचस्प, बल्कि पसंदीदा खेल साबित होगा। इस खेल को राष्ट्रीय स्तर पर तो खेला जाता ही है, इसके साथ-साथ इसे वायु सेना, थल सेना के करतबों में भी शामिल किया गया है। अब तक मलेशिया, यूएसए, पाकिस्तान समेत दुनिया के कई अन्य मुल्कों में इस खेल का प्रशिक्षण दे चुके 68 वर्षीय कोच डा. दरदी का सपना अपने मुल्क में इस खेल को बुलंदी तक ले जाने का है।

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