जंगलों की आग ने तोड़ा 28 साल का रिकार्ड

Una Updated Thu, 07 Jun 2012 12:00 PM IST
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बंगाणा (ऊना)। उपमंडल बंगाणा के लगभग सभी जंगल जलकर तबाह हो गए हैं। जंगलों में ऐसी तबाही 28 वर्षों के बाद देखी गई है। इतने व्यापक स्तर पर 1984 में जंगलों में आग लगी थी। अब 2012 में जंगल जलकर नष्ट हुए हैं। इसमें लाखों की सरकारी वन संपदा स्वाह हो गई है। सोलहसिंगी धार सुकड़ियाल से लेकर बुधान, कोहडरा तक आग ने सब कुछ नष्ट कर दिया है। रामगढ़धार के जंगल, जोगीपंगा के जंगल, लमलैहड़ी का जंगल, झंबर के जंगल, ध्यूंसर, खड़ोल, तलमेहड़ा, त्यासर के जंगल सब जल कर आग की भेंट चढ़ गए हैं। जो वन संपदाएं ग्रीन हिमाचल के नाम से प्रसिद्ध थीं, वे आज कहीं भी देखने को नहीं मिल रही हैं। इस आग की भेंट में कई जीव जंतु, नए पौधे और जंगली जानवर चढ़ चुके हैं।
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जंगलों में आग ने तबाही मचा रखी है। जंगल की आग से ही कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र के डीहर, खड़ोल और खरूणी में लोगों के मकान भी जल चुके हैं। इसमें इन परिवारों का लाखों का नुकसान हुआ। पंचायत डीहर के खड़ोह गांव में दस लोगों के घर आग की भेंट चढ़े। कई परिवारों को अपना कीमती सामान निकालने का मौका भी नहीं मिला। लोगों के गहने, नकदी व कपड़े सब जंगल से आई आग की भेंट चढ़ गए हैं। इस बार कुटलैहड़ में करोड़ों की संपत्ति आग की भेंट चढ़ी है। जानकारी के अनुसार जंगल की आग में 1983-84 में 4060 हेक्टेयर भूमि जली थी। वर्ष 1989 से लेकर 1992 में जंगल जलने की रिपोर्ट शून्य रही। इस वर्ष अधिकतर जंगल जल गए, पर विभागीय आंकड़ों के अनुसार वन परिक्षेत्र बंगाणा में 354.56 हेक्टेयर जंगल जला। रामगढ़धार में 100 हेक्टेयर जंगल जला है। जिला वन अधिकारी आरएस पटियाल का कहना है कि कुटलैहड़ में 500 हेक्टेयर जंगल जला है। ज्यादा जंगल भरवाईं में जला है, लेकिन यदि कुटलैहड़ में धरातलीय सच्चाई देखी जाए तो एक दो जंगलों को छोड़कर सभी जंगलों में आग ने अपना तांडव दिखाया है।
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