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मातर पंचायत की प्रधान मनीषा शर्मा पद से निलंबित

Shimla	 Bureauशिमला ब्यूरो Updated Wed, 12 Feb 2020 09:36 PM IST
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नाहन (सिरमौर)। पंचायत के विकास कार्यों में अनियमितता बरतने पर ग्राम पंचायत मातर की प्रधान मनीषा शर्मा को पद से निलंबित कर दिया गया है। उपायुक्त डॉ. आरके परूथी ने हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 145 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह आदेश जारी किए हैं। वहीं, यह भी स्पष्ट किया है कि यदि उनके पास पंचायत संबंधित चल या अचल संपत्ति है तो वह उसे तुरंत पंचायत सचिव के हवाले कर दें।
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पंचायत प्रधान मनीषा शर्मा के खिलाफ राम निवास निवासी नलका, देविंद्र दत्त निवासी मातर ने मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्प लाइन में शिकायत दर्ज करवाई थी। इसके बाद खंड विकास अधिकारी के माध्यम से पंचायत प्रधान को नोटिस जारी किया गया। उपायुक्त ने डॉ. आरके परूथी ने बताया कि पंचायत प्रधान को प्राथमिक जांच के बाद कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। पांच फरवरी को मामले में प्रधान का जवाब प्राप्त हुआ। लेकिन, जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। लिहाजा, प्रधान को पद से निलंबित किया गया है। जबकि पंचायत सचिव मानो देवी और सहायक कर्मचंद के खिलाफ भी जांच के आदेश दिए गए हैं।

विकास कार्यों में गड़बड़ी पर गिरी गाज
- शिकायत के अनुसार 14वें वित्त आयोग से पंचायत में कुओं की मरम्मत के कार्य वार्ड सदस्यों से करवाए गए। कुओं पर लगाए गए ढक्कन प्रधान ने स्वयं बनवाकर पंचायत सदस्यों को मुहैया कराए। ढक्कन पर खर्चा मूल्यांकन राशि 44570 रुपये अधिक व्यय किया गया। वहीं, मनरेगा के तहत लगाए गए वायरक्रेट से संबंधित कार्य जनवरी 2017 में पूर्ण हो गया था। इसके लिए 2000 रुपये प्रति ट्राली की कोटेशन 26 फरवरी 2017 का पास की गई। धन अदायगी के समय कोई भी कोटेशन मौके पर नहीं थी। बिना कोटेशन 2,37000 रुपये की अदायगी पास कर दी गई। इतना ही नहीं पंचायत के एक व्यक्ति को प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास योजना के तहत दोहरा लाभ दिया गया। इंदिरा आवास योजना के तहत 27500 और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1,30,000 की राशि प्रदान की गई। प्राथमिक जांच में दोहरा लाभ प्रदान करने के लिए पंचायत प्रधान मनीषा शर्मा, सचिव मानो देवी और लाभार्थी रामकिशन दोषी पाए गए।

आरोप निराधार, करेंगी अपील
- पंचायत प्रधान मनीषा शर्मा ने बताया कि उनके खिलाफ लगाए तमाम आरोप निराधार है। वह इस मामले में अपील करेंगी। जो भी कार्य किए हैं वह मौके पर सही है। उन्होंने जांच पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक ही विभाग के दो कर्मचारी जब मूल्यांकन करते हैं तो वह अलग-अलग पाई जाती है। एक ही असेसमेंट में लगभग 27 हजार रुपये तो एक ही असेंसमेंट में 44 हजार रुपये निकलते हैं। जहां तक आवास योजना में दोहरे लाभ बात है तो यह मामला उनके पदभार संभालने के बाद 2016 में पहली ग्रामसभा में आया था। तत्कालीन सचिव ने लिस्ट पढ़कर सुनाई। यह 2011 में बनी थी लिस्ट है। इस बैठक में लोगों ने कहा कि इसका अभी भी कच्चा मकान है। इसे ग्राम सभा में पास किया। इसके बाद तमाम कार्य बीडीओ ऑफिस से होते हैं। पंचायत की इसमें कोई भूमिका नहीं है।
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