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हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा पर बनेगा एशिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध

Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 16 Jan 2022 11:42 PM IST
हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर किशाऊ बांध स्थल, जहां टोंस नदी पर बांध बनेगा।
हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर किशाऊ बांध स्थल, जहां टोंस नदी पर बांध बनेगा। - फोटो : NAHAN
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शिलाई (सिरमौर)। हिमाचल एवं उत्तराखंड राज्य की सीमा पर तमसा (टोंस) नदी पर बांध बनाया जाएगा। दावा किया जा रहा है कि यह एशिया का दूसरा बड़ा बाध होगा। इसमें हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की बराबर की हिस्सेदारी रहेगी।

परियोजना में 90 फीसदी खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सरकार 10 फीसदी हिस्सा देगी। किशाऊ बांध 236 मीटर ऊंचा और 680 मीटर लंबा होगा जिसमें 660 मेगावाट बिजली तैयार होगी।

इस बांध के बनने से हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। सबसे ज्यादा लाभ इस बांध से दिल्ली को होगा, जहां पानी की आपूर्ति को पूरा किया जाएगा।
बता दें कि किशाऊ बांध सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना है। इसके निर्माण को लेकर हिमाचल और उत्तराखंड राज्यों ने अपनी सहमति दे दी है। सरकार ने वर्ष 2008 में इसको राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया है।
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32 किलोमीटर लंबी बनेगी झील
इस परियोजना के अंतर्गत हिमाचल के मोहराड़ से लेकर उत्तराखंड के त्यूणी तक 32 किलोमीटर की लंबी झील बनेगी। अभी तक की सर्वेक्षण रिपोर्ट में बांध की जद में 81300 पेड़, 631 लकड़ी के मकान, 171 पक्के मकान, उत्तराखंड व हिमाचल के 632 सामूहिक परिवार, 508 एकल परिवार, 8 मंदिर, 6 पंचायतें, 2 अस्पताल, 7 प्राथमिक पाठशालाएं, 2 माध्यमिक स्कूल और एक इंटर कॉलेज आएंगे।
इस परियोजना का कुल क्षेत्र 2950 हेक्टेयर है जिसमें हिमाचल की 1498 हेक्टेयर और उत्तराखंड की 1452 हेक्टेयर भूमि बांध में जलमग्न हो जाएगी। दोनों राज्यों के 900 परिवार प्रभावित होंगे।
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ये रहेगी राज्यों की हिस्सेदारी:
बांध परियोजना में हरियाणा राज्य 478.85 करोड़, उत्तर प्रदेश 298.76 करोड़, राजस्थान 93.51करोड़, दिल्ली 60.50 करोड़, उत्तराखंड 38.19 करोड़ व हिमाचल 31.58 करोड़ खर्च करेगा। बीते वर्ष 21 सितंबर को बोर्ड की बैठक और 24 नवंबर को हाई पावर स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में निर्णय लिया गया कि किशाऊ बांध परियोजना की डीपीआर संशोधित की जाएगी।
इस संशोधन से पूर्व सिरे से हाईड्रोलॉजिकल डाटा, सर्वेक्षण, अतिरिक्त सर्वेक्षण, विस्तृत जियो तकनीकी इन्वेस्टिगेशन, ताजा सीस्मिक पैरामीटर स्ट्डीज, परियोजना में संशोधित खर्च के हिसाब से संशोधित ढांचा तैयार किया जाएगा। इस संशोधन के लिए नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी की मदद से हाइड्रोलॉजिकल डाटा संग्रहण किया जाएगा।
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15 हजार करोड़ रुपये आएगी लागत
आईआईटी रुड़की की मदद से सीस्मिक डिजाइन पैरामीटर स्टडी की जाएगी। इसके बाद संशोधित डीपीआर तैयार की जाएगी। माना जा रहा है कि संशोधित डीपीआर में इस परियोजना की लागत 11 हजार करोड़ से बढ़कर 15 हजार करोड़ हो सकती है।
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सिरमौर के ये गांव होंगे प्रभावित
किशाऊ बांध परियोजना बनने से प्रभावित होने वाले हिमाचल जिला सिरमौर उपमंडल शिलाई के गांव मोहराड़, मशवाड, कंड्यारी, नेरा, बड़ालानी, सियासु, थनाणा, धारवा, शिला जिला के गांव गुम्मा, फेलग, अंतरोली और उत्तराखंड के क्वानु, सावर, कोटा सहित 17 गांव प्रभावित होंगे।
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विस्थापितों के सुझाव
लोगों ने सुझाव दिया कि सरकार को कोई ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिससे बांध भी बन जाए और लोगों को विस्थापित भी न होना पड़े। कोटी-इछाड़ी जैसी परियोजना की तरह इस बांध को तीन छोटी-छोटी इकाइयों में तब्दील किया जाए, जिससे लोगों का विस्थापन न हो। पर्यावरण पर भी विपरीत असर न पड़े। क्वानु गांव जैसी उपजाऊ जमीन कहीं नहीं हो सकती है। क्वानु गांव तमसा नदी के किनारे पहाड़ों के बीच मैदानी जगह पर बसा है, जहां कभी सूखा नहीं पड़ता।
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90 फीसदी राशि खर्च करेगी केंद्र सरकार : हर्षवर्धन चौहान
शिलाई के विधायक हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि किशाऊ बांध परियोजना पर केंद्र सरकार 90 फीसदी राशि खर्च करेगी। इस बांध में सिरमौर जिला शिमला और उत्तराखंड के गांव बांध परियोजना की बनने वाली झील के डूब क्षेत्र में आएंगे, जिससे लोगों का विस्थापन होगा। सरकार ने अभी तक प्रभावित होने वाले लोगों की सूची नहीं बनाई है। जिनकी जमीन डूब क्षेत्र में जानी है, सरकार उन्हें उचित मुआवजा राशि प्रदान करे। साथ ही बांध परियोजना का कार्य युद्धस्तर पर आरंभ करे।
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हिमाचल सरकार ने दी स्वीकृति: बलदेव तोमर
खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक बलदेव तोमर ने बताया कि टोंस नदी पर बनने वाले किशाऊ बांध परियोजना के लिए हिमाचल सरकार ने अपनी स्वीकृति दे दी है। उत्तराखंड राज्य की भी सहमति है। किशाऊ बांध की पहले भी डीपीआर तैयार की गई थी, अब पुन: इसकी डीपीआर बनाई जानी है। इसके तैयार होते ही किशाऊ बांध का निर्माण कार्य आरंभ किया जाएगा।

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