‘जीवन दर्शन सिखाने वाली मैं भारत की नारी’

Sirmour Updated Mon, 08 Oct 2012 12:00 PM IST
‘जीवन दर्शन सिखाने वाली मैं भारत की नारी’
नाहन (सिरमौर)। जिला भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से शनिवार को एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ स्कूल सतौन के प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यातिथि तथा अध्यक्षता जिला भाषा अधिकारी भीम सिंह चौहान ने की।
इस अवसर पर स्थानीय तथा बाहर से पहुंचे कवियों ने अपनी रचनाओं को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि चिरानंद की प्रस्तुति ‘भारत की कुछ बात अलग है यू तो सुंदर है संसार’ ने वातावरण को देश भक्ति से जोड़ दिया। वहीं नीना शिवांगी की रचना ‘धरती का दर्द’ भी सभी ने सराही।
युवा कवि श्रीकांत अकेला की रचना गजल के रूप में सभी को रोमांचित कर गई। उनकी गजल के बोल थे कि ‘क्यों हकीकत है मौन, कह नहीं पा रहा हूं। किसने लूटा है कौन...’ को खूब प्रशंसा मिली। इसके अलावा रेखा देवी की प्रस्तुति ‘जीवन दर्शन सिखाने वाली मैं भारत की नारी हूं..’सभी ने सराही।
लिलि गुप्ता की कविता ‘उन्होंने आंगन में बोये हैं बारूद’ ने वातावरण को गंभीर बना दिया। अनंत आलोक की रचना ‘तंबाकू से घर भरे, नाना रोग हजार...’ भी सभी ने सराही। इसके अलावा विजय कंवर, किशन सिंह गतवाल, महेंद्र सिंह, रणजीत कौर, शिवा सरगम, जय गोपाल गुप्ता आदि कवि सम्मेलन में उपस्थित थे।

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