लहसुन उत्पादन में हो रहा घाटा

Sirmour Updated Sat, 29 Sep 2012 12:00 PM IST
लहसुन उत्पादन में हो रहा घाटा
शिलाई (सिरमौर)। जिला के किसानोें को लहसुन की खेती करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। जो लहसुन पहले 80 से 100 रुपये प्रति किलो बिकता था। वह अब 15 से 30 रुपये किलो बिक रहा है। इसका प्रमुख कारण यह भी है कि दुबई, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और केलिफार्निया मेें लहसुन का निर्यात बंद हो गया है। मार्च और अप्रैल में इन देशों में खूब निर्यात हुआ, लेकिन मई से निर्यात बंद है।
राज्य के शिमला, सोलन और सिरमौर में लहसुन की बंपर फसलें होती हैं। यहां उपज का 70 फीसदी हिस्सा सोलन की कृषि मंडी में बिक जाता है। इस वर्ष 80 फीसदी दामों में आई गिरावट से किसानों को कोल्ड स्टोर, बीज, खाद और भाड़ा भी वसूल नहीं हो रहा है।
राज्य के अतिरिक्त मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश में भी लहसुन की बंपर फसल हुई है। बैंगलूर, चैन्नई और जयपुर के कोल्ड स्टोरों में सारा माल जमा पड़ा है।
नौहराधार क्षेत्र के किसान रमेश कुमार, कमल चंद, नाया पंजौड़ के भारत भूषण मोहील, लोझा मानल के दीप शर्मा और रामानंद शर्मा का कहना है इस समय उन्हें 15 से 30 रुपये प्रति किलो के हिसाब से दाम मिल रहे हैं। जो लागत से कम हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 15 अक्तूबर के बाद भारत की मंडियों में चीन का लहसुन आ जाता है। इससे दामों मेें और गिरावट आ जाएगी। सोलन लहसुन मंडी के व्यापारी पद्म पुंडीर का कहना है कि देश के राजस्थान और यूपी से किसान अपना लहसुन लेकर सोलन पहुंच रहे हैं। कुछ दिनों में चाइनीज लहसुन के आने से दाम और गिर जाएंगे।

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