जड़ सड़न रोग से बचाएं सेब बगीचे को

Rampur Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
रोहडू। बागवानी विशेषज्ञों ने बागवानों को सेब के बगीचों को जड़ सड़न रोग से बचाने की सलाह दी है। इन दिनों बगीचे में जड़ सड़न रोग की रोकथाम करना अति आवश्यक है। इस रोग से पौधे की जड़ें सड़ने लगती हैं। नमी और छायादार बगीचों में यह रोग अधिक तेजी से फैलता है। रोग की चपेट में आने से पौधे का विकास पूरी तरह रुक जाता है।
जड़ सड़न रोग की रोकथाम सर्दियों में की जा सकती है। बागवान सेब के उन पौधों की जड़ों को जहां रोगग्रस्त होने की संभावना है, धूप लगाने के लिए खोल दें। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि सेब के पौधों का कलमी भाग मिट्टी में न दबे। जो बगीचे अधिक नमी और छायादार हैं, उनमें जड़ सड़न रोग के लक्षण अधिक होते हैं। समय पर रोकथाम न होने के कारण पौधा खत्म भी हो जाता है। विशेषज्ञ बागवानों को रोग की समय पर रोकथाम करने की सलाह दे रहे हैं। बागवानी विशेषज्ञ डा. नरेंद्र कायथ ने बताया कि जड़ सड़न रोग अधिकतर नमी तथा छायादार बगीचों में पनपता है। इस रोग की रोकथाम बहुत आवश्यक है। अगर समय पर रोग की रोकथाम न की जाए तो पौधा शीघ्र खत्म जाता है। बागवान सर्दियों में रोगग्रस्त पौधों की जड़ों से मिट्टी हटाकर धूप लगने के लिए खोल दें। रोगग्रस्त पौधों की जड़ों से जख्म को साफ करके उसमें फफूंदीनाशक पेस्ट लगाएं। जड़ों में पानी को न रुकने दें। पानी की निकासी के लिए नालियां बनाएं। बगीचे में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। खरपतवार सेब की जड़ों में न उगने दें।

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