बिखर गया ज्ञान चंद, सनम जंग का परिवार

Rampur Updated Sat, 27 Oct 2012 12:00 PM IST
रामपुर बुशहर। झाकड़ी हादसा दो परिवारों पर दुखों का पहाड़ बन टूटा है। एक परिवार के चार सदस्य मौत की आगोश में चले गए। इसी परिवार की बेटी के लिए भी हादसा ताउम्र नहीं भूल सकेगा। बेटी का पति भी हादसे में काल का ग्रास बन गया। कल्पा निवासी ज्ञान चंद और उनकी पत्नी सनम जंग को जिंदगी के आखिरी पड़ाव में ऐसा जख्म मिला, जो कभी भर न सकेगा। गसो में हुए कार हादसे में उनसे दो जवान बेटे और बहुएं हमेशा के लिए जुदा हो गए।
कल्पा निवासी कर्म दास तथा भगवान सिंह ज्ञान चंद के बेटे थे। दोनों की पत्नियां भी हादसे में काल का ग्रास बन गई। पहले तो दोनों को अपनों की मौत पर यकीन ही नहीं हुआ, जब उनके सामने एक साथ चार-चार शव पहुंचे तो आंसूओं का सैलाब टूट पड़ा। आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। दो जवान बेटों की मौत होने पर अब छोटा बेटा देवेंद्र ही बुढ़ापे की लाठी बचा है। हादसे में बचे पोतों को देखकर उन्हें जिंदगी की गाड़ी आगे बढ़ानी पड़ेगी। एसडीएम केआर सेहजल ने बताया कि प्रभावितों को दस-दस हजार की फौरी राहत प्रदान की गई है।
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फूट-फूटकर रोया छोटा भाई देवेंद्र
हादसे की सूचना मिलने पर शवों को लेने ज्ञान चंद का छोटा बेटे देवेंद्र रिश्तेदारों के साथ खनेरी अस्पताल पहुंचा। यहां पहुंचते ही देवेंद्र और उनके रिश्तेदार फूट-फूट कर रोने लगे। देवेंद्र के कंधों पर अचानक अब माता-पिता और पूरे परिवार की जिम्मेवारी आ पड़ी है।
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मम्मी-पापा ठीक हैं न!
कार गिरने के बाद दोनों बच्चे हिम्मत दिखाते हुए न केवल सड़क तक पहुंचे, बल्कि उन्होंने हादसे की सूचना भी पुलिस को दी। वे रात को अंधेरे में ढांक को क्रास कर सड़क तक पहुंचे। नौ वर्षीय रोहित ने बताया कि जिस वक्त हादसा हुआ, उस समय वह सोया था। गाड़ी के गिरने के बाद वह खाई में चालक के ऊपर था। पास ही उसका भाई कृष्ण कुमार था। कृष्ण कुमार उसे हाथ पकड़ कर ऊपर लाया। अस्पताल में कृष्ण कुमार से मिलने जब उसके रिश्तेदार पहुंचे तो सबसे पहले उसके मुंह से यही निकाला ...मम्मी-पापा ठीक हैं न!
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रात भर खाई में पड़े रहे शव
कार हादसे में मरे पांच लोगों के शवों को शुक्रवार सुबह ही निकाल जा सका। रात भर शव खाई में ही पड़े रहे। पुलिस का कहना है कि रात को अंधेरा होने के कारण शवों को नहीं निकला जा सका। पुलिस, होमगार्ड, आर्मी के जवानों ने रात को नीचे उतरकर पांचों को मृत पाया था।
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मेहंदी छूटी नहीं थी साथ छूटा गया
निशा के हाथों से अभी मेहंदी भी नहीं थी कि जीवन साथी का साथ छूट गया। हादसे में मौत की आगोश में सोए हमीरपुर निवासी आशीष कुमार निशा के पति थे। निशा पुत्री भगवान सिंह की कुछ दिन पहले ही आशीष के साथ शादी हुई थी। उनके शादी समारोह में ही शरीक होने उसके माता-पिता और ताया-ताई हमीरपुर गए थे। समारोह निपटने के बाद दामाद आशीष अपने सास-ससुर को छोड़ने कल्पा आ रहे थे।

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