सेब बगीचों में रेड माइट का हमला

Rampur Updated Thu, 19 Jul 2012 12:00 PM IST
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रोहड़ू। सेब के बगीचों में तापमान बढ़ने से रेड माइट का प्रकोप तेजी से फैल गया है। बागवानी विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बागवान समय पर बगीचों में माइट की जांच करें। कीट पर समय के भीतर नियंत्रण नहीं हुआ तो पौधे तथा फल को भारी नुकसान हो सकता है।
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क्षेत्र के बराल, बारला, कुई, बजरेट कोटी, खलाड़गी, दलगांव, जुब्बल तथा चिड़गांव में मध्यम ऊंचाई के सेब के बगीचे माइट की चपेट में आ चुके हैं। उद्यान विकास अधिकारी अग्रदास ने ने कहा कि बागवान बगीचों में माइट बीमारी पर समय के भीतर नजर रखें।
क्या है माइट
सेब के पत्तों पर सूक्ष्म लाल रंग की मकड़ी के आकर का कीड़ा माइट है। चौबीस घंटे में इसकी तादाद में बढ़ोतरी होती है। यदि एक पत्ते पर चार से अधिक माइट पाए गए तो वे पौधे तथा फल दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं।
कैसे पहुंचाते हैं नुकसान
माइट की कीट पौधे की पत्तियों से क्लोरोफिल चूस कर खत्म करता है। उसके बाद पत्तियों का रंग सुनहरा या तांबे की तरह हो जाता है। पत्तियां सुनहरा होने के बाद समय से पहले गिरना शुरू हो जाती हैं। माइट के कीट से क्षतिग्रस्त पत्तियों को झड़ने के बाद पौधे तथा फल दोनों का विकास रुक जाता है। धूप में पौधे अपना भोजन बनाना बंद कर देते हैं। बीमारी से ग्रस्त कमजोर पौधे में दूसरे वर्ष भी फसल प्रभावित होने की संभावना रहती है।
कैसे करें जांच
सेब के बगीचे में यदि पौधे की पत्तियों का रंग सुनहरा या तांबे की तरह नजर आए तो पत्तियों को निचली सतह पर लैंस से जांच करें। पौधे में सूक्ष्म मकड़ी की तरह कीट नजर आएंगे। इनका रंग लाल या दो ब्लैक स्पाट का होता है।
कैसे करें नियंत्रण
उद्यान विकास अधिकारी आग्रदास का कहना है कि माइट की जांच के बाद यदि एक पत्ते में चार से अधिक माइट नजर आएं तो नियंत्रण के लिए 50 एमएल फैनाजाईक्विन दो सौ लीटर पानी में छिड़काव करें। माइट की दवाइयां उद्यान विभाग के सभी दवाई विक्री केंद्रों में उपलब्ध हैं।
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