एफडीआई के विरोध में बीमा कर्मियाें का प्रदर्शन

Mandi Updated Sat, 06 Oct 2012 12:00 PM IST
मंडी। एफडीआई को लेकर मंडी में बीमा कर्मियों ने केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले के विरोध में प्रदर्शन किया। बीमा कर्मियों को केंद्रीय मंत्रिमंडल का बीमा क्षेत्र एवं पेंशन में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने तथा पेंशन में 26 प्रतिशत की मंजूरी देना रास नहीं आ रहा है। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस फैसले के विरोध में बीमा कर्मियों ने भोजनावकाश के दौरान जोरदार नारेबाजी करते हुए अपना विरोध जताया। कर्मचारियों को संबोधित करते हुए शिमला मंडल के सहसचिव मनोहर चंदेल ने कहा कि यूपीए-2 सरकार देश की परिसंपत्तियाें को अमेरिकन साम्राज्यवाद के आगे घुटने टेकते हुए बहुराष्ट्रीय कंपनियाें के हवाले करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि बीमा अधिनियम 1938 में प्रावधान है कि बीमा क्षेत्र में जो धन एकत्रित होता है, उस धन को केवल अपने देश में ही निवेश किया जा सकता है, लेकिन सरकार विदेशी बीमा कंपनियों के दबाव में इसमें संशोधन करना चाहती है। इससे विदेशी कंपनियों को हमारे देश की पूंजी को विदेशों में निवेश की अनुमति मिल जाएगी। इसके अलावा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत होती है तो देश की लघु बचतों पर विदेशी कंपनियाें का नियंत्रण बढ़ता ही जाएगा, जबकि नई पेंशन योजना लागू होने से कर्मचारियों के मध्य नई एवं पुरानी दो अलग-अलग पेंशन योजनाएं हो जाएंगी। उन्हाेंने कहा कि बीमा संगठन नई पेंशन नीति का विरोध इसलिए करता है कि नई पेंशन योजना के तहत कर्मचारियों को अपने वेतन का कुछ अंश पेंशन कोष में डालना पड़ेगा। इससे तैयार कोष को पेंशन कोष नियामक प्राधिकरण नियंत्रित करेगा, जो शेयर बाजार में इस अंशदान का निवेश करेगा। उन्हाेंने कहा कि यह कर्मचारियाें के खून पसीने की कमाई से जुआ खेलने जैसा है। जिसका बीमा कर्मी कड़ा विरोध करते हैं।

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