देश की 12 फीसदी भूमि भूकंप के दृष्टिगत संवेदनशील

Mandi Updated Tue, 24 Jul 2012 12:00 PM IST
मंडी। आपदाओं की श्रेणी में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है। इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए जन जागरूकता, एकीकृत, परंपरावादी, वैज्ञानिक ज्ञान, सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों की सहभागिता और सहयोग करना अत्यंत अनिवार्य है। देश की 12 प्रतिशत भूमि प्रलयकारी भूकंप आने के दृष्टिगत संवेदनशील है।
राजकीय वल्लभ महाविद्यालय मंडी के पत्रकारिता एवं जन संचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. चमन प्रेमी ने इग्नू एवं एनडीएमए के तहत आपदा प्रबंधन में क्षमता निर्माण विषय पर आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में बतौर मुख्य रिसोर्स पर्सन शिरकत की। उन्होंने देश में मुख्य 31 प्रकार की आपदाओं का हवाला देते हुए कहा कि हिमालय क्षेत्रों में बादलों का फटना, आसमानी बिजली का कहर, जंगलों में आग लगना, भूस्खलन, बाढ़ एवं भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा हमेशा बना रहा है। प्राकृतिक आपदाओं के प्रभावों को कम करना अनिवार्य है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से संबंधित आपदाओं को जीवन के लिए विनाशकारी करार दिया।
इंटरगर्वनमेंटल पैनल आन क्लाइमेट चेंज की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा देश की 12 प्रतिशत भूमि प्रलयकारी भूकंप आने के दृष्टिकोण से संवेदनशील है। इसमें हिमाचल प्रदेश भी शामिल है। 40 प्रतिशत मिलियन हेक्टेयर भूमि में बाढ़ आने की प्रबल संभावना है। आपदाओं से निपटने के लिए ज्योग्राफिकल इन्फारमेशन सिस्टम (जीआईएस) एवं रिमोट सैंसिंग जैसी आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान की तकनीकें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। विषय सबंधित डाक्यूमेंट्री फि ल्में प्रतिभागियों के लिए प्रदर्शित की गई। इग्नू केंद्र मंडी के समन्वयक प्रो. अनिल ठाकुर ने भी विचार रखे।

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