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धान, मक्की की फसल पर संकट

Mandi Updated Sat, 23 Jun 2012 12:00 PM IST
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पांगणा (मंडी) क्षेत्र में तपती गर्मी से जहां पेयजल का संकट गहरा गया है, वहीं क्षेत्र में धान और मक्की की फसल भी सूखे की चपेट में आ गई है। इसके चलते किसान धान की फसल बचाने को लेकर चिंतित हैं। करसोेग में जहां दो सहायक ईमला-बिमला खड्डें पूरी तरह से सूख गई हैं, वहीं पांगणा खड्ड में भी पानी नाम मात्र ही रह गया है। इसके चलते करसोग सहित पांगणा में करीब 2200 हेक्टेयर धानी फसल को सूखे से नुकसान का संकट लगातार बढ़ रहा है। किसान धान की पनीरी को सूखे से बचाने के लिए पानी के जुगाड़ में कूहलों, खड्डाें में भटक रहे हैं। करसोग में 100 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई हो गई है।
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किसानों में रामकृष्ण, हेतराम, भाग चंद, हेमराज, मोलक राम, दलपत, गोकल, रामसरन, शुक्रु राम, बुधी राम, कौल राम, पनीया, जीवानंद आदि का कहना है कि दो-चार दिन में बारिश न हुई तो धान और मक्की के साथ सब्जियां भी बर्बाद हो जाएंगी। वहीं बागवानों की सेब की फसल भी सूखे के चलते प्रभावित हो रही है। किसानों-बागवानों क ो ओलावृष्टि पहले ही भारी नुकसान पहुंचा चुकी है। जबकि अब सूखे की चपेट करारा झटका दे रही है। वर्षा के लिए मन्नत मांगने क्षेत्र के किसान देवताआें की शरण में जा रहे हैं। मगर, फिलहाल प्रार्थनाओं का कोई असर नहीं दिखा है।
उधर, कृषि विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ कुलदीप शर्मा ने बताया कि बारिश के अभाव में पानी की भारी कमी हो गई है। इसके चलते फसलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। समय रहते बारिश न हुई तो किसानों को भारी नुकसान हो सकता है।
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