पिछडे़ वर्गों को 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग

Mandi Updated Wed, 13 Jun 2012 12:00 PM IST
पंडोह (मंडी)। हिमाचल में पिछड़े वर्गों को हर राजनैतिक दल ने आरक्षण के नाम पर गुमराह किया है। ऐसे कई विभाग हैं जहां आरक्षण लागू ही नहीं किया गया है। राजनैतिक दल अपने स्वार्थ और वोट बैंक की खातिर पिछड़ा वर्ग में नई जातियां शामिल कर रही है। पिछड़े वर्गों के हितों पर यूपीए सरकार ने भी कुठाराधात किया। 4.50 प्रतिशत आरक्षण 27 प्रतिशत से काटकर मुसलमानों को दे दिया गया। भूपाल ने कहा कि इसका सुप्रीम कोर्ट से न्याय मांगेंगे।
यहां जारी बयान में अखिल भारतीय प्रजापति पिछड़ा वर्ग महासंघ के कार्यकारी अध्यक्ष लेख राम भूपाल, महासचिव चमन वर्मा, उपाध्यक्ष भगत राम, सरदार त्रिलोचन सिंह, इंद्र सिंह ने कहा कि हिमाचल सरकार ने 18 प्रतिशत आरक्षण ही दिया है। आय सीमा रखी है, वह कम है। पिछड़े वर्ग के परिवारों को प्रमाण पत्र लेने में भी भारी कठिनाई होती है। जाति प्रमाण पत्र के मान्यता की अवधि छह माह रखी गई है, जोकि पिछड़ा वर्ग से सरासर अन्याय है।
भूपाल ने सरकार से मांग की है कि पिछड़ा वर्ग का प्रमाण पत्र अनुसूचित जाति एवं जन जाति के आधार पर एक बार ही बने। आरक्षण को 27 प्रतिशत किया जाए। पिछड़ा वर्ग बोर्ड में प्रजापति समाज के नेता को सदस्य नहीं बनाया है। न ही भाजपा शासित प्रदेशों की तर्ज पर माटी कला बोर्ड का गठन किया है।

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