शिक्षा का उद्देश्य है धरोहर को पहचानना : उप कुलपति

Mandi Updated Sun, 10 Jun 2012 12:00 PM IST
नेरचौक (मंडी)। करिश्मा एजूकेशन कालेज डडौर की ओर से वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह धूमधाम के साथ मनाया गया। इस मौके पर हिमाचल प्रदेश विवि के उप कुलपति एडीएन वाजपेयी बतौर मुख्यातिथि मौजूद थे। इस अवसर पर अपने संबोधन में वाजपेयी ने कहा कि हमारे देश ने विश्व को बहुत कुछ दिया है। गणित, संगीत, भाषा, लिपि एवं नृत्य भारत की ही देन है। वहीं आत्मा की खोज भी भारत की विश्व को सबसे बड़ी देन है। भारत की स्थापना एक आध्यात्मिक देश के रूप में हुई है। हम आज आधुनिकता की दौड़ में अपनी पूंजी और शक्ति भूलते जा रहे हैं। यह वह शक्ति है जिसने पूरे ब्रह्मांड को छुआ है। हमें आज ऐसी शिक्षा की आवश्यकता है जिससे अपने अंदर छूपी अपार क्षमताओं को जागृत कर बाहर लाया जा सके। शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति निर्माण नहीं बल्कि मुक्ति प्राप्त करना होना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य अपनी धरोहर को पहचानना और अपने अंदर के ज्ञान को डी लाइन करने का प्रयास करना चाहिए। इस अवसर पर कालेज प्रबंधन समिति के अध्यक्ष कृष्ण चंद, प्रधानाचार्य एस पाणी एवं एमडी ललित पाठक भी मौजूद थे। समारोह के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। मुख्यातिथि ने प्रशिक्षुओं को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

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