शबरी जैसी प्रतीक्षा हो तो राघव अवश्य मिलते

Mandi Updated Thu, 31 May 2012 12:00 PM IST
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सुंदरनगर (मंडी)। यहां के गोपाल मंदिर में आयोजित राम कथा के अंतिम दिन बुधवार संत स्वामी लक्ष्मणदास महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि शबरी जैसी प्रतीक्षा जीवन में आ जाए तो राघव अवश्य मिलते है। अरण्यकांड जयन्त के चोंच मारने से आरंभ होता है अंत शबरी प्रसंग पर होता है।
जयंत ने मां सीता के चरणों में चोंच मारकर बहुत बड़ा अपराध किया था। किंतु उसके शरणागत होने पर भगवान ने एक नेत्र करके जयन्त को छोड़ दिया। भगवान अत्रि के आश्रम पधारे हैं, जहां पर सती अनुसूया ने सीता को सती धर्म, पतिव्रत धर्म का उपदेश दिया है। सुतीक्षण को दर्शन देते हुए भगवान पंचवटी पहुंचे हैं। आकाश, पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु तत्व से बनी यह शरीर ही पंचवटी है। यहीं रावण की बहन सूर्पनखा आती है। उसकी नाक- कान कटती है। वह खर दूषण के पास जाती है। भगवान खर दूषण का वध करते है। रावण मरीच से मिलकर सीता का हरण कर लेता है। भगवान सीता की खोज में निकलते हैं। शबरी पर कृपा करते हैं। शबरी के शरीर से दिव्य तेज निकली और भगवान के चरणों में समा गई। समुद्र तट पर माता सीता की तलाश में बानर सेना पहुंचती है। जामवंत भी हनुमान को उनके बल की याद दिलाते हैं। हनुमान सीता का पता लगाकर आते है। सेतुबंध हुआ, सारी सेना समुद्र के पार गई। युद्ध आरंभ हुआ, विभिषण प्रभु के शरणागति हुआ और कुंभकर्ण, मेघनाद और रावण वध के साथ पाप पर पुण्य की जीत दर्ज हुई। विभिषण को लंका का राज्य देकर जानकी और लक्ष्मण को साथ लेकर भगवान अयोध्या लौटते हैं। जहां पर उनका राज्यभिषेक होता है ।
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