शरण में होगा हैंडलूम सुविधा केंद्र का निर्माण

Shimla	 Bureauशिमला ब्यूरो Updated Fri, 07 Aug 2020 09:18 PM IST
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पतलीकूहल में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर कार्यक्रम में बुनकरों को पुरस्कृत करते हुए।
पतलीकूहल में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर कार्यक्रम में बुनकरों को पुरस्कृत करते हुए। - फोटो : Kullu

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कुल्लू/पतलीकूहल। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर नग्गर के शरण गांव को हैंडलूम क्रॉफ्ट विलेज में शामिल किया गया है। इस अवसर पर पतलीकूहल स्थित तिब्बतियन स्कूल के सभागार में समारोह का आयोजन किया गया।
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डॉ. ऋचा वर्मा ने कहा कि कुल्लू जिला के लिए यह गौरव की बात है कि यहां के शरण गांव को क्राफ्ट हैंडलूम विलेज के तौर पर विकसित करने के लिए देश के तीन गांवों में चुना गया है। इस गांव में मूलभूत सुविधाओं के सृजन तथा सौंदर्यीकरण पर लगभग 1.40 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। गांव में भव्य हैंडलूम सुविधा केंद्र का निर्माण किया जाएगा। इसमें तैयार किए गए उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा। बुनकरों के लिए प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण किया जाएगा तथा सैलानियों को स्वयं बुनाई करने के अनुभव की सुविधा प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि शरण अपने आप में एक ऐतिहासिक गांव है और क्राफ्ट हैंडलूम विलेज के तौर पर विकसित होने पर इस क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त होगी, जिससे यहां पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी। साथ ही लोगों की आर्थिकी को मजबूती मिलेगी। उपायुक्त ने कहा कि शरण गांव के लोग प्राचीन समय से खड्डी पर बुनाई का काम करते आए हैं। सर्दी ज्यादा होने के कारण अपने पूरे परिवार को घरों में ही ऊनी वस्त्र तैयार किए जाते हैं। ऊन का उत्पादन भी लोग स्थानीय तौर पर ही कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गांव के सौंदर्यीकरण और मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने के लिए एक व्यापक खाका तैयार किया गया है, जिस पर काम भी शुरू हो चुका है। निश्चित तौर पर यह गांव निकट भविष्य में सैलानियों के लिए पसंदीदा स्थल के तौर पर उभरेगा। डीसी डॉ. ऋचा वर्मा ने मंत्रालय की ओर से शरण गांव के 25 बुनकरों को हथकरघा भी वितरित किए। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह, मुख्य सलाहकार एपीएमसी रमेश शर्मा, जिला भाजपा महामंत्री अखिलेष कपूर तथा शरण गांव की महिला बुनकर भी समारोह भी उपस्थित रहीं।
हैंडलूम विलेज में अन्य गांव भी करें शामिल
कुल्लू। जिला परिषद सदस्य एवं उपाध्यक्ष प्रदेश भाजपा धनेश्वरी ठाकुर ने कहा कि जिला में हथकरघा और हस्तशिल्प की अपार संभावना है। इस क्षेत्र में विशेषकर महिलाओं के लिए काफी रोजगार हैं। उन्होंने कहा कि शरण गांव की तर्ज पर जिला के अन्य गांवों को भी हैंडलूम विलेज में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिला में बहुत गांव हैं, जहां महिलाएं अपने घरों में पारंपरिक खड्डियों में बुनाई का काम करती हैं और सर्दी ज्यादा होने के कारण पूरे परिवार के लिए गर्म कपड़ों की स्वयं व्यवस्था करती हैं। उन्होंने कहा कि शरण गांव को ज्येष्ठ मलाणा भी कहा जाता है। यहां के लोगों की दिनचर्या देवी-देवताओं के नाम से शुरू होती है।
मकानों और परंपरागत वेशभूषा के लिए विख्यात शरण
शरण गांव पुरानी शैली के मकानों और परंपरागत वेशभूषा के लिए विख्यात है। यहां के लोग भेड़पालन से जुडे़ हैं। साथ ही ऊन का उत्पादन होने के कारण यहां ऊनी धागा ज्यादा होता है। लोग खड्डियों पर पट्टू, दोहड़ू, शॉल व ऊन का पट्टी के पारंपरिक उत्पादों का तैयार करते हैं। ऊन से बनने वाले वस्त्रों को गांव के लोग सर्दी के साथ गर्मी के दिनों में भी तैयार करते हैं। 100 से भी अधिक घरों वाले ऐतिहासिक शरण गांव में करीब 50 से अधिक बुनकर हैं।
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