ट्रेवल एजेंटों को पैसा ट्रांसफर कर कसोल में लेते थे कैश

Shimla Bureau Updated Wed, 08 Nov 2017 09:58 PM IST
ट्रेवल एजेंटों को पैसा ट्रांसफर
कर कसोल में लेते थे कैश
शातिर गैंग अलग-अलग खातों में डालते थे पैसे
छह किलो चरस के साथ पकड़े आरोपियों का खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। नई दिल्ली स्थित निजामुदिन रेलवे स्टेशन में कसोल से सप्लाई हुई छह किलो चरस के साथ पकड़े आरोपी बेहद शातिर हैं। सप्लाई से मिलने वाले कैश को आरोपी अपने साथ लेकर नहीं चलते थे। इसके लिए आरोपियों ने चालाकी के साथ अलग-अलग माध्यम अपनाए हुए थे। ट्रेवल एजेंटों व अलग-अलग खातों में ही पैसा ट्रांसफर किया जाता था।
एनसीबी की पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी हिमाचल से बाहर रहते हुए कसोल स्थित ट्रेवल एजेंट्स को पैसा ट्रांसफर करते थे। बाद में कसोल पहुंचने पर ट्रेवल एजेंट्स से केश ले लेते थे। जिससे उनके पास एक साथ अधिक कैश होने को लेकर कोई दिक्कत नहीं रहती थी। वहीं, सात-आठ बैंक खातों में 50-50 हजार रुपये डालते थे, ताकि किसी को कोई शक न हो। एक साथ इक्ट्ठा कैश बैंक खाते में नहीं डाला जाता था। मुंबई का समगर कसोल के छोज गांव में रहकर माल सप्लाई करवाता था और मलाणा क्रीम के नाम पर आरोपी को अच्छी खासी कीमत मिल जाती थी। जिसे घर तक पहुंचाने के लिए भी कई फंडे अपनाए गए थे। मलाणा क्रीम के लिए बदनाम मणिकर्ण घाटी में चरस के कारोबार को मुंबई व गोवा तक पहुंचाने के लिए गैंग में नगवाईं के लोग भी शामिल थे। जांच में सामने आया है कि आरोपी रमेश कुमार व उसका पिता नील चंद पैसों को जमीन लेकर निवेश कर रहे थे और घर बना रहे थे। उच्च गुणवता वाली चरस मलाणा इलाके में होती है और इसकी इंटरनेशनल मार्केट कसोल मानी जाती है। हर वर्ष मलाणा क्षेत्र में इस भांग को नष्ट करने के लिए पुलिस अभियान चलाती है, बावजूद यहां चरस तस्करी थमने का नाम नहीं ले रही है। इधर, एनसीसी के पुलिस अधीक्षक आशीष ओझा ने बताया कि एनसीबी हर पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ा रही है।

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