अस्थायी पुल पर चल रही जिंदगी

Kullu Updated Mon, 05 May 2014 05:30 AM IST
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पलचान (मनाली)। मनाली के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सोलंगनाला के पास सोलंग गांव आजादी के 67 वर्ष बाद भी उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। मनाली में हर पर्यटक सोलंग की वादियों को निहारे बिना वापस नहीं जाता है, लेकिन साथ लगते सोलंग गांव में सुविधाओं का अभाव है। यहां लोगों की मांग सोलंगनाला और सोलंग गांव को जोड़ने वाले ब्यास नदी पर एक स्थायी पुल बनाने की है। पुराना पुल वर्ष 2005 की बाढ़ में बह गया था। उसके बाद किसी भी सरकार ने भी इसकी सुध नहीं ली। सोलंग गांव के करीब साढ़े तीन सौ ग्रामीण अभी भी अपनी जान जोखिम में डाल कर सामान को पीठ पर ढोने के लिए विवश हैं। सोलंग के ग्रामीणों को हर वर्ष लकड़ी का अस्थायी पुल बनाना पड़ता है। यहां पर प्रकृति ने भी कई बार कहर बरपाया है। आसपास के क्षेत्रों में अक्सर भूस्खलन होते रहते हैं। वहीं, वर्ष 2008 में सोलंग गांव पूरी तरह से आग की भेंट चढ़ गया था। उसके बाद सभी पार्टियों के प्रमुख नेताओं ने पुल बनाने के कोरे आश्वासन दिए जो आज तक कोरे ही साबित हुए हैं। वर्ष 2013 में हुए मंडी लोकसभा के उपचुनाव का सोलंग के ग्रामीणों ने बहिष्कार भी किया था, जिसका सरकार और प्रशासन पर कोई असर नहीं हुआ। सोलंग गांव निवासी देवी चंद ठाकुर, टिकम राम ठाकुर, कर्म चंद, गोकुल चंद, बोधी देवी, निर्मला देवी, लाल चंद तथा चमन लाल ने बताया कि वे कई वर्ष से कठिन जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इन लोगों ने बताया कि कुछ ही दूरी पर अरबों से रोहतांग टनल का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन मनाली के प्रसिद्ध पर्यटक स्थल सोलंग को एक पुल के लिए सरकार गंभीर नहीं है।
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