बंद न हो जाए स्कूलों में दोपहर का भोजन

Kullu Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
कुल्लू। सरकारी स्कूलों में दोपहर को उबलने वाली खिचड़ी की हांडी संकट में है। यही नहीं खिचड़ी का प्रबंध करने में जुटे गुरुओं की जेबें भी हल्की होने लगी है। कम बजट के चलते शिक्षकों को मिड डे मील योजना के तहत दोपहर का भोजन तैयार करवाना अब मुश्किल ही नहीं नामुमकिन लगने लगा है। सरकार की तरफ से जहां घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के लिए 450 रुपये का बजट मिलता है वहीं एजेंसी से यही सिलेंडर अब 1250 रुपये में मिलने लगा है। ऐसे में शिक्षकों को 800 रुपये अपनी जेब से भरने पड़ रहे हैं। यह दिक्कत गैस सिलेंडरों पर सब्सिडी खत्म होने से हुई है।
जिला में 982 सरकारी स्कूल हैं। सब्सिडी में किए बदलाव के बाद प्रदेश में अभी तक रसोई गैस के लिए विशेष बजट का प्रावधान मिड डे मील के लिए नहीं हो पाया है। अध्यापकों का कहना है कि पहले ही मिड-डे मील को कम बजट मिल रहा है। अब सिलेंडर 1250 रुपये में मिलने से दोपहर का भोजन बनाना मुश्किल हो गया है।
प्राथमिक शिक्षक संघ जिला कुल्लू के अध्यक्ष डीणे राम, महासचिव दवेंद्र नेगी, कोषाध्यक्ष उत्तम ठाकुर, टीजीटी यशपाल शर्मा और किशोरी लाल ने बताया कि मिड-डे मील के लिए सब्सिडी पर सिलेंडर न मिलने से अध्यापकों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। अब सिलेंडर 1250 रुपये में मिल रहा है। इससे अध्यापकों को 800 रुपये का चूना लग रहा है। गैस एजेंसी वाले अब अतिरिक्त सिक्योरिटी भी मांग रहे हैं। ऐसे में कई स्कूलों में दोपहर का भोजन बंद करने की नौबत आ गई है। संघ का कहना है कि उन्होंने यह मुद्दा विभाग और सरकार से उठाया है, लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला है।

केंद्र सरकार को भेजा है प्रस्ताव : शर्मा
शिक्षा उपनिदेशक एलीमेंटरी प्रदीप शर्मा ने बताया कि सब्सिडी पर गैस सिलेंडर न मिलने के बारे में सात नवंबर को शिमला में शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। बैठक में इस समस्या का हल निकालने का प्रयास किया है। मामला केंद्र सरकार से जुड़ा है अत: इसका प्रस्ताव केंद्र को भेजा है।

बच्चों को कैसे मिलेगा
फिर पौष्टिक आहार
मिड डे मील बजट से उठे सवाल
प्रति बच्चा 3.11 रुपये तय कुकिंग कास्ट
स्र अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। बच्चों को पौष्टिक भोजन करवाने की सलाह देने वाले नेता और सरकारी अमला धरातल पर इसे खुद ही अमल करवाने में एक तरह से नाकाम नजर आ रहा है। इसका अंदाजा सरकारी स्कूलों में दोपहर को परोसे जाने वाले भोजन को मिल रहे बजट से लगाया जा सकता है।
स्कूलों में मिड डे मील बनाने के लिए प्राइमरी के एक बच्चे पर 3.11 रुपये कुकिंग कास्ट तय कर रखी है। इसके अलावा अप्पर प्राइमरी के एक बच्चे के लिए 4.65 रुपये कुकिंग कास्ट निर्धारित की है। कुकिंग कास्ट में दाल, तेल गैस सिलेंडर और अन्य खर्चे शामिल हैं। कुकिंग कास्ट में खाना बनाने वाले का मानदेय और चावल शामिल नहीं है। मिड -डे मील के लिए चावल डिपो से दिए जाते हैं। लेकिन महंगाई के इस दौर में 3.11 और 4.56 रुपये में कितना बेहतर सामान बाजार से मिलेगा या फिर एक बच्चे को कितना पौष्टिक आहार मिलता होगा इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

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