520 मेगावट नकथान परियोजना में बदलाव

Kullu Updated Fri, 19 Oct 2012 12:00 PM IST
सैंज (कुल्लू)। प्रसिद्ध तीर्थ स्थान रुद्रनाग में ग्रामीणों के विरोध के बाद 520 मेगावाट की नकथान जल विद्युत परियोजना के निर्माण कार्य में बदलाव कर दिया है। देवता रुद्रनाग के पवित्र जलस्रोत के सूखने की आशंका जताकर ग्रामीण निर्माण कार्य का विरोध कर रहे थे। अब परियोजना प्रबंधन ने डाइवर्शन टनलों का प्रारूप बदल दिया है। परियोजना के पूर्व प्रारूप में पार्वती नदी की जल धारा को निहार थाच के पास मोड़ कर भूमिगत टनल से सर्ज शाफ्ट तक लाया जाना था। दूसरी तरफ से तोष नाले के पानी को भी भूमिगत टनल से ही सर्ज शाफ्ट तक लाए जाने की योजना थी।
पार्वती नदी से आ रही टनल रूद्रनाग तीर्थ स्थान से दो किमी पीछे और तीन सौ मीटर नीचे से जा रही थी। पावर हाउस नकथान गांव और रूद्रनाग के बीच में पांच सौ मीटर अंदर रखा था। परियोजना के इस प्रारूप पर ग्राम विकास समिति को आपत्ति थी। ग्रामीणों को रुद्रनाग के पवित्र जलस्रोत सूखने का अंदेशा था।
एचपीपीसीएल के परियोजना प्रमुख रमेश चौधरी ने बताया कि ग्रामीणों की आपत्ति को देखते हुए परियोजना का प्रारूप पूरी तरह से बदल दिया है। मौजूदा प्रारूप में पार्वती डाइवर्शन से आने वाली टनल रुद्रनाग तीर्थ स्थान से चार किमी पीछे और दो किमी नीचे कर दी है। दूसरी तरफ तोष नदी की डाइवर्शन साइट से आ रही टनल को बूढ़ा वन के सामने वाली पहाड़ी से जोड़ा है। इस जगह से दोनों नदियों का पानी एक भूमिगत टनल में डालकर नीचे की ओर शर्ज शाफ्ट से पावर हाउस में लाया जाएगा। विद्युत गृह स्थान को भी बदला है। अब इसे नकथान गांव से नीचे गवाच्छा गांव में रखा जाएगा। विद्युत गृह से पानी को फिर टीआरटी से पार्वती नदी में डाला जाएगा। प्रारूप लोगों की मांग पर बदला है। अब इससे लोगों की धार्मिक आस्था को ठेस नहीं पहुंचेगी।
परियोजना प्रभारी राजन शर्मा ने बताया कि नए प्रारूप से अब रुद्रनाग और नकथान गांव को कोई खतरा नहीं। परियोजना के सारे उपक्रम भूमिगत हैं और गांव से कम से कम एक किमी की दूरी पर हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि प्रारूप बदले जाने के बाद परियोजना का निर्माण कार्य सुचारु रूप से चलने में प्रबंधन का सहयोग करें।

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