लाहौल के सेब पर ललचाए व्यापारी

Kullu Updated Wed, 08 Aug 2012 12:00 PM IST
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। शीत रेगिस्तान लाहौल-स्पीति जिला में तैयार होने वाले सेब पर बाहरी व्यापारियों की नजरें टिक गई हैं। सेब का आकार अभी बना भी नहीं है व्यापारियों ने बगीचों की बुकिंग शुरू कर दी है। इससे सेब उत्पादकों के चेहरे पर रौनक आने लगी हैं। बाहरी राज्यों में इस बार सेब की चिलिंग को देखते हुए व्यापारियों ने यहां बगीचों का ठेका करना शुरू कर दिया है। अभी सेब सीजन शुरू होने को करीब ढाई माह का समय और लग सकता है। कुछ सालों से लाहौली किसानों का रुझान आलू मटर की खेती के साथ सेब और सब्जी उत्पादन की ओर मुड़ गया है।
बागवानी विशेषज्ञों के मुताबिक लाहौल घाटी का वातावरण सेब उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल है। यहां तैयार होने वाली सेब रसीले अधिक होने के साथ ही इसका छिलका मोटा है। इसे कोल्ड स्टोर में अधिक समय तक रखा जा सकता है। पट्टन घाटी के बागवान रमेश कुमार, राजेश, अमर और राजू ने बताया कि बागवानों को पिछले साल 20 किलो ग्राम पेट्टी के 1500 रुपये तक दाम मिले थे। इस बार बेहतर रुपये मिलने की संभावना है। जिला बागवानी विशेषज्ञ डा. सोनम ने बताया कि शुरुआती दौर में लाहौली सेब ने अपनी पहचान बनाई है। आने वाले समय में रोहतांग टनल खुलने के बाद लाहौली सेब मार्केट में धूम मचाएगा। इसके लिए बागवानों को अभी से जागरूक होने की आवश्यकता है। तांदी पंचायत के प्रधान सुरेश कुमार ने बताया कि पूर्व में लाहौल स्पीति केे रितेश चौहान ने सेब को प्रमोट करने के लिए मनरेगा में शामिल कर एक दिशा दी है। आने वाले समय में लाहौल स्पीति जिला सेब उत्पादन के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाएगा।

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