देवालयों का जलना देव प्रकोप तो नहीं

Kullu Updated Fri, 22 Jun 2012 12:00 PM IST
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कुल्लू। देव संस्कृति के लिए देश-विदेश में मशहूर कुल्लू जिला में देवी-देवताओं के मंदिर और देवालय राख के ढेर में तबदील हो गए।
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मानव जाति के साथ देवी-देवताओं पर भी विपदा का पहाड़ टूटने लगा है। आगजनी के पीछे चाहे जो भी कारण रहे हों लेकिन इन घटनाओं को देव प्रकोप होने से जोड़ कर भी देखा जाने लगा है। कहीं देवता लोगों से रूठ तो नहीं रहे हैं। बुधवार को सांघा में रियालु नाग का ऐतिहासिक मंदिर भी आग में भस्म हो गया। इससे पहले मोहणी गांव में हुए अग्निकांड में भी देवता रियालु नाग का देवालय जल चुका है।
देवी-देवताओं के घरों में घट रही आगजनी की घटनाओं से देव समाज के लोग चिंतित हैं। इसी साल अप्रैल में उपमंडल के पाशी गांव में जमलू देवता के मंदिर में भयंकर आग लगी। आग की लपटों में मंदिर समेत देवता जमलू और नारायण के सोने-चांदी के आभूषणों से सुसज्जित देवरथ राख हो गए थे। इस घटना में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। इससे पहले खोड़ू देवता चैहणी, गर्गाचार्य तलाड़ा के मंदिर भी आग की भेंट चढ़ चुके हैं। विश्व की सबसे प्राचीन जम्हूरियत को मशहूर मलाणा गांव का भीषण अग्निकांड आज भी लोग भूला नहीं सके हैं। इस अग्निकांड ने जहां डेढ़ सौ से अधिक परिवार बेघर किए वहीं, देवता जमलू के मंदिर, अकबर के जमाने के तमाम आभूषण समेत कई मंदिर जल गए थे। घाटी के लोग इस तरह की घटनाओं को देव प्रकोप से जोड़ कर देख रहे हैं। देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ने जिला में हो रही ऐसी घटनाओं पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि समस्या के समाधान बारे देवताओं के समक्ष पूछ डाली जा सकती हैं।
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