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पानी होता तो कम होती तबाही

Kullu Updated Fri, 22 Jun 2012 12:00 PM IST
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बंजार (कुल्लू)। चारों तरफ चीख पुकार। आग की उठती तेज लपटें और बुझाने के लिए पानी नहीं। गांव सड़क से इतना दूर कि दमकल वाहन पहुंचना मुश्किल। आंखों के सामने जलते अपने घरों को देखकर हर कोई बाल्टी भर-भर कर जलते मकानों पर उड़ेल रहा था। कोई मिट्टी खोद कर फेंक रहा था। सांघा गांव में बुधवार रात लगी आग के बाद तबाही की तस्वीर कुछ इस तरह ही बन रही थी। ग्रामीणों ने इस विपदा से निपटने की हर कोशिश की लेकिन पानी की कमी के चलते उनकी मेहनत अंजाम तक नहीं पहुंच पाई। देखते ही देखते चार मकान जलकर स्वाह के ढेर में बदल गए। लोगों का कहना है कि गांव में पानी होता तो शायद कुछ घरों को बचाया जा सकता था।
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ग्रामीण कहते हैं कि यदि गांव में पानी की पर्याप्त मात्रा होती तो कुछ घरों को जलने से बचाया जा सकता था। प्रभावित चेत राम, राम दास, रोहित और चंद्रकात ने बताया कि आग की लपटें उठते ही लोग सहम उठे। आग बुझाने का गांव में कोई साधन नहीं था। गांव से कई किलोमीटर दूर से लोगों ने पानी ढोया और पावर स्प्रे, मिट्टी तथा बाल्टियों से पानी फेंककर किसी तरह आग पर काबू पाया। ग्रामीणों ने आईपीएच महकमे से मांग की है कि जल्द इलाके के लिए नई पाइप लाइन बिछाई जाए। भविष्य में यदि ऐसी घटना हो तो समय रहते उस पर काबू पाया जा सकता है।
सड़क सुविधा से वंचित है गांव
सांघा गांव सड़क सुविधा से वंचित है। गांव तक पहुंचने के लिए करीब एक घंटे का पैदल सफर तय करना पड़ता है। ऐसे में आग बुझाने के तमाम सरकारी तामझाम धरे के धरे रह गए। अग्निकांड ने एक तरह से सरकारी व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है।
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