स्वाह के ढेर में ढूंढ रहे यादें

Kullu Updated Thu, 14 Jun 2012 12:00 PM IST
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मनाली। हाड तोड़ मेहनत कर तिनका-तिनका जोड़ी कमाई पल भर में राख के ढेर में बदल गई। आग की तपिश शांत हुई तो उंगलियां स्वाह के ढेर में कुछ साबुत पाने की उम्मीद में घूमी जरूर लेकिन मिला कुछ नहीं। कालिख में बदल चुके सामान के सामने बैठे इन लोगों को अब चिंता सिर पर एक छत दोबारा खड़ा करने की है। मनाली में मंगलवार देर शाम हुए अग्निकांड की तबाही का मंजर बुधवार की पौ फटने पर कुछ इस तरह ही नजर आ रहा था।
अग्निकांड में खोखों में रह रहे 5 तिब्बती शरणार्थी और 4 गुजराती गरीब परिवार बेघर हो गए। शाम 7 बजकर 55 मिनट पर भड़की आग ने सबकुछ खाक कर दिया। लकड़ी के बने इन खोखों में आग इस तरह फैली कि इस पर काबू नहीं पाया जा सका। साथ लगते 9 के नौ खोखे देखते ही देखते जलकर राख हो गए। खोखों में पड़ा सारा सामान भी जल गया। तिब्बती शरणार्थी सोनम गोंपू , एवांग छूटंग, फूं चोग लामो, दोरजे, पालदान हांसी तथा गुजराती परिवार मुकेश, कांता, वल्लभ और मोहन इन खोखों में रहते थे। रोजी रोटी के लिए रोज की भांति काम पर गए थे। बेघर हुए तिब्बती शरणार्थी परिवार और गुजराती परिवारों के कांता, मोहन, सोनम गोंपू, फूंचोग लामो ने बताया कि मनाली प्रशासन ने तुरंत राहत राशि के तौर पर एक-एक कंबल तो दे दिए, लेकिन पकाने तथा खाना खाने के बर्तन तथा तन ढकने के लिए कपडे़ तक नहीं बचे हैं।

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