स्थाई पुल होता तो बच जाती जान

Kullu Updated Fri, 08 Jun 2012 12:00 PM IST
पतलीकूहल। सत्रह मील में वीरवार सुबह 12 साल के बच्चे की जान चली गई। बच्चा ब्यास जैसी उफान वाली नदी पर स्थाई पुल न होने के चलते झूला पुल से ही इसे पार करने चला था। लेकिन उसे क्या पता था कि देश भर में मेडल जीतकर अव्वल होने का ढिंढोरा पिटने वाली सरकार और लोक निर्माण विभाग की ढील के चलते उसकी जान चली जाएगी।
इस घटना से लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। हैरानी कि बात है कि 17 सालों में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों की सरकारें आईं और चली गईं। लेकिन किसी को 17 मील, हरिपुर, रामपुर ब्राण और धमसू जैसे दर्जनों गावों के लोगों का दर्द नजर नहीं आया। स्थानीय रिग्जिन, पवन, रमेश, गांथुराम, प्रोमिला सभी एक ही सवाल कर रहे हैं कि 17 साल पहले 1995 में आई भीषण बाढ़ में बहे 17 मील के पुल को सरकार क्यों नहीं बना पाई?
आखिर कितनी मौतों के बाद सरकार और प्रशासन कुंभकरणी नींद से जागेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ब्यास पर पुल बन गया होता तो शायद यह हादसा टल जाता। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अशोक चौहान का कहना है कि 17 मील में ब्यास पर करीब सात करोड़ की लागत से पुल बनाया जा रहा है।

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