अब तक तीन पायलट समा चुके हैं मौत की आगोश में

Kangra Updated Sun, 27 Oct 2013 05:41 AM IST
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बैजनाथ (कांगड़ा)। मानवीय परिंदों के खेल पैराग्लाइडिंग का हर क्षण जोखिम से भरा है। जरा सी लापरवाही हुई तो मौत आपको लपकने के लिए तैयार बैठी है। बिलिंग में पैराग्लाइडिंग के 33 साल के इतिहास में अब तक तीन पायलटों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों पायलट गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यहां तक कि कुछेक पायलट घटना के बाद उड़ान भरने के काबिल नहीं रहे हैं। फिर भी जांबाज पायलटों के कदम खेल के नए मुकाम को हासिल करने से पीछे नहीं हटे हैं। 12 वर्ष पूर्व जोल किचन नाम के पायलट का अब तक पता नहीं चल सका है। गत पांच वर्ष पूर्व हुई दुर्घटना में विदेशी पायलट ग्लैक्सी लापता होने के छह माह बाद मृत मिला था।
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तीन वर्ष पूर्व हुई घटना में रूस के पायलट इगोर को पालमपुर की पहाड़ियों से घटना के तीन दिन बाद हेलीकाप्टर की मदद से सुरक्षित निकाला जा सका था। जबकि इगोर को बचाने गए दल में शामिल यूक्रेन के पायलट यूदिन की पांव फिसलने से मौत हो गई थी। गत वर्ष हुई घटना में विदेशी पायलट के बड़ा भंगाल में लैंड करने की सूचना के बाद हेलीकाप्टर बड़ा भंगाल गया और पायलट को सुरक्षित बीड़ लाया गया, लेकिन बचाव करने गया एक अन्य विदेशी पायलट बड़ा भंगाल में ही रह गया और बाद में हेलीकाप्टर के दो मर्तबा बड़ा भंगाल जाने के बावजूद मौसम ने हेलीकाप्टर को नीचे नहीं आने दिया। बाद में पायलट को 72 किलोमीटर का पैदल सफर तय करके बीड़ आना पड़ा। बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुरेश ठाकुर, मीट इवेंट देबू चौधरी का कहना है कि ऐसी घटनाएं इस साहसिक खेल का हिस्सा हैं और पायलटों को एहतियात बरतनी चाहिए।
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