वाणियों में सर्वश्रेष्ठ गुरुवाणी

Kangra Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
धर्मशाला। विश्व विख्यात रामकथा वाचक संत मोरारी बापू ने कथा से छठे दिन कहा कि सत्य को बहुधा वाणी में ही प्रतिष्ठित माना गया है और वाणी पांच प्रकार की होती है। ब्रह्म वाणी, देव वाणी, वेद वाणी, आत्म वाणी और गुरुवाणी।
ब्रह्म वाणी परम शून्य, परम विस्तार से निकली वाणी है, जो कि महात्मा ही सुन सकते हैं। देववाणी या दिव्य वाणी ब्रह्म वाणी से थोड़ा नीचे इसे भी सुनना आम जन के वश में नहीं। वेद वाणी अपने-अपने शास्त्रों की वाणी है, इसे भी पढ़ना और समझना कठिन है। आत्मवाणी मनुष्य के सबसे करीब कोई वाणी है तो वह उसकी अंतरात्मा की आवाज है, पर वो आज के दौर में कपटों से ढक गई है तथा सुनना मुश्किल है। मोरारी बापू ने आत्मवाणी पर शायराना अंदाज में कहा कि एक चेहरे पर कितने चेहरे लगे हैं, देखकर आइना भी तंग आ गया है। गुरुवाणी उक्त वाणियों से सर्वश्रेष्ठ वाणी है, पर इसका श्रवण गुरु से ही करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रत्येक तत्व की अपनी वाणी है, जैसे जल की वाणी, वायु की वाणी, अग्नि की वाणी व पृथ्वी की वाणी, लेकिन मनुष्य उस वाणी को समझने में असमर्थ है। सत्य कैसा होता है, सत्य सदा रहने वाला, अनंत व अपरिवर्तित होता है। प्रतीक्षा या धैर्य सत्य को समझने में सहायता करता है। तपस्या से सत्यरूपी हरि के दर्शन हो जाते हैं। इसी प्रकार प्रतीक्षा से भी सत्य का बोध होता है। इसलिए प्रतीक्षा भी तपस्या के समान है। बापू ने कहा कि वर्तमान दौर में असत्य बोलने पर एकदम विश्वास कर लिया जाता है और सत्य बोलने पर हजारों सवाल किए जाते हैं। आज का समाज नियमों में ज्यादा बंधा है। मैं यह नहीं कहता कि नियम गलत हैं, पर खुद को नियमों में बांधना उचित नहीं। नियम है कि माला जाप करते समय दाएं हाथ का प्रयोग करो, पर क्या किसान द्वारा बाएं हाथ से बीजा बीज अन्न उत्पन्न नहीं करता। भाव यह है कि दायें-बायें मायने नहीं रखता, मायने रखता है बीज का बोना, उसी प्रकार माला का सहृदय से जाप किया जाना चाहिए। वीरवार को रामकथा में कई विशिष्ट लोगों ने शिरकत की। इनमें टाट बाबा, वेस्ट इंडीज से स्वामी ब्रह्मदेव महाराज, जम्मू से आचार्य विजय कृष्ण तथा जैन साध्वियों ने विशेष रूप से शिरकत कर रामकथा का श्रवण किया। भोजपुरी गायक व अभिनेता मनोज तिवारी ने वीरवार को पूरा दिन मोरारी बापू की रामकथा सुनी।


गोविंद-गोविंद... गाए जा पर झूमे श्रोता
वीरवार को रामकथा के अंत में पंडाल में उपस्थित श्रोता मोरारी बापू के भजन गोविंद-गोविंध गाए जा पर खूब झूमे। पूरा पंडाल हरिराम भक्ति से सराबोर हो गया।

फूल का खिलना उसका स्वभाव
रामकथा के दौरान उन्होंने कहा कि फूल का खिलना उसका गुण नहीं, कांटे का चुभना उसका अवगुण नहीं, यह तो इन दोनों का स्वभाव है।

राम नाम ही एक मंत्र है
मोरारी बापू ने कहा कि राम का नाम ही मंत्र हैं। उन्होंने हरिराम नाम जपने की विधा है दूसरों की मदद करना। इस तरह से जो दूसरों की मदद करता है। वह खुद ही राम नाम का जप कर लेता है।

मोरारी बापू से मिले भक्त
वीरवार शाम 5 से 6 बजे तक मोरारी बापू ने भक्तों से मिलकर उनकी समस्याएं भी सुनीं। इस दौरान मोरारी बापू के दर्शनों के लिए व्हाइट हैवन रिजार्ट में साधकों की खूब भीड़ लगी रही।

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