यह गूंगी मोहब्बत है, न हम बोलते हैं न वो...

Kangra Updated Thu, 27 Sep 2012 12:00 PM IST
धर्मशाला। विश्व विख्यात रामकथा वाचक संत मोरारी बापू ने कहा कि मनुष्य को सदा सत्य मार्ग पर चलना चाहिए। सत्य का मार्ग कठिन है। इस मार्ग पर बहुत कुछ खोना भी पड़ता है, लेकिन मनुष्य इस मार्ग को त्यागे नहीं। धर्मशाला में रामकथा के पांचवें दिन पंडाल में साधकों ने रामकथा के अमृतवचनों का रसपान किया। कथा के दौरान भक्ति संगीत में साधक डूब गए। बुधवार को रामकथा के दौरान भगवान राम का जन्म हुआ। मोरारी बापू ने भगवान के जन्म का प्रसंग प्रस्तुत कर कर साधकों को भाव-भिवोर कर दिया। बापू ने कहा कि सदा सत्य बोलने से कोई हानि नहीं होती, बल्कि इसका फायदा ही होता है।
सही और सहो एक ही धातु के बने हैं, अर्थात सत्य बोलने वाले को सहना ही पड़ेगा। श्रद्धा से सत्य की प्राप्ति होती है। भगवान ऐसी स्थिति दे कि मैं तीन घंटे तक चुप रहूं और लाखों लोग मुझे सुनते रहें। इस पर मोरारी बापू ने कहा कि यह गूंगी मोहब्बत है, न हम बोलते हैं, न वो बोलते हैं...। इसमें भी आनंद है, पर शब्द का होना आवश्यक है, क्योंकि पीने का मजा मयखाने में है, वहां पर जिसने पकाई है, चखी है, वही परोसता भी है। मोरारी बापू ने कथा स्थल की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह मेरा मयखाना है। सद्गुरु जुबां से नहीं, हृदय से बोलता है। सद्जनों ने इसी को अमृत का नाम दिया है। हर मनुष्य के लिए सत्य एक है। हर व्यक्ति के लिए इसके अलग-अलग मायने हैं। वास्तव में सत्य स्थिरता का बोध है। श्रीमद्भागवत गीता में भगवान कृष्ण ने भक्तों से कहा है कि हिमालय मेरी विभूति है... तुम हिमालय का स्मरण करो, स्थिर हो जाओगे।
सत तत्व हमेशा से जगत में विद्यमान था, है और हमेशा रहेगा। मोरारी बापू ने कहा कि कई बार कहा जाता है कि सत्य का मुख सोने से ढका होता है। सत्य का मुख देखना आसान भी नहीं है। उदाहरण देते हुए बापू ने कहा कि किसी कन्या का मुख देखने के लिए भी पहले वर बनना पड़ता है। वर अर्थात श्रेष्ठ, यानी सत्य का दर्शन करने के लिए पहले श्रेष्ठ बनना पड़ेगा।

प्रभु की पूजा नहीं प्रेम करो
प्रेम को कोई नहीं ढक सकता। किसी की दाद या फरियाद सुनकर सत्य मार्ग पर चलने वाला अपने मार्ग से न रुके, क्योंकि यह दाद और फरियाद झूठी है। पूजा सस्ती है, इसलिए सभी पूजा करते हैं। भगवान राम तो भक्तों से प्रेम ही मांगते हैं और भक्तों से प्रेम ही करते हैं। मैं यह नहीं कहता कि पूजा मत करो, पर अपने प्रभु से प्रेम भी जरूर करो। बापू ने कहा कि गोस्वामी तुलसी दास ने गर्भित संकेत दिए हैं कि किसी-किसी महापुरुष के वचन सत्य हैं। मानव जीवन में घटने वाली कोई-कोई घटना सत्य है। जीवन में आया कोई-कोई काल सत्य है तथा मिलने वाला कोई-कोई व्यक्ति सत्य होता है। दैनिक दिनचर्या में हमें जब भी प्रसन्नता महसूस हो, वह सत्य है। जिस प्रकार मैं कथावाचन करता हूं तो प्रसन्नता महसूस होती है, मेरे लिए यही सत्य है। जगत सपना है, पर सत्संग सपना नहीं है। किसी भी मनुष्य की रुचि असत्य में नहीं होती, क्याेंकि हम सत्य की संतान हैं। कोई भी व्यक्ति विष नहीं पीना चाहता, क्योंकि हम अमृत की संतान हैं।

..जहां-जहां से गुजरे
शायरी तो मात्र बहाना है, मकसद तो उस परमात्मा को रिझाना है। इस दौरान बापू ने साहिर लुधियानवी की पंक्तियों का जिक्र करते हुए कहा कि माना कि इस जमीं को हम गुलजार न कर सके, कुछ खार कम कर दिए, जहां-जहां से गुजरे.... अर्थात मनुष्य को प्रयास से नहीं हटना चाहिए, फूल न खिला सके तो कुछ कांटों को ही कम किया जाए।

जब मैं मैट्रिक में तीन बार फेल हुआ...
‘मानस सत्य’ पर आधारित रामकथा में सत्य का मर्म समझाते हुए मोरारी बापू ने खुलासा किया कि जब वह मैट्रिक में पढ़ते थे तो तीन बार फेल हुए। बकौल, मोरारी बापू मैं आगे पढ़ा, लेकिन ज्यादा पढ़कर क्या करता। ग्रेजुएट हो जाता। उसके बाद एमए और अगर प्रोफेसर बन जाता तो तर्क में उलझा हुआ आज आपके सामने भक्ति में आंसू न बहा पाता।

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