दुग्ध गंगा योजना से मुंह मोड़ा

Kangra Updated Fri, 29 Jun 2012 12:00 PM IST
धर्मशाला। प्रदेश सरकार और नाबार्ड बैंक की ओर से शुरू की गई दुग्ध गंगा योजना वर्तमान समय में कछुआ चाल चल रही है। कांगड़ा जिले में ढाई साल के दौरान इस योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या में 50 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है।
यह योजना जिला कांगड़ा में सुचारु रूप से 2010-11 में शुरू हुई। जबकि प्रदेश में इस योजना ने 2008-09 में दस्तक दी। इस दौरान जिला कांगड़ा में 2010-11 में 441 किसानों ने इस योजना का लाभ उठाया। जबकि 2011-12 में यह आंकड़ा गिरावट के साथ 201 पर पहुंच गया। इसके अलावा चालू वित्त वर्ष में दो माह के दौरान मात्र 10 किसानों ने इस योजना का लाभ लिया। अत: 16 लाख से ज्यादा की आबादी वाले कांगड़ा जिला में अब तक मात्र 651 किसानों ने इस योजना का लाभ उठाया। इस बारे में पशु पालन विभाग के उप निदेशक एचआर सांख्यान का कहना है कि यह योजना नाबार्ड बैंक द्वारा चलाई गई है तथा विभाग सिर्फ इसमें किसानों की मदद कर सकता है। बावजूद इसके विभाग द्वारा लोगों को इस योजना केबारे में जागरूक करने के लिए सौ से ज्यादा कैंप लगाए गए, लेकिन फिर भी लोग इस योजना में रुचि नहीं ले रहे।

क्या हैं कारण
लोग इस योजना में इसलिए दिलचस्पी नहीं ले रहे क्योंकि इसमें समय और मेहनत दोनों ही ज्यादा लगते हैं। लोग आसान व्यवसाय की ओर दौड़ रहे हैं। इसी कारण इतनी सुविधाएं देने के बावजूद यह मुहिम सिरे नहीं चढ़ पा रही। हालांकि हिमाचल में दूध की सप्लाई पंजाब से होती है जबकि हिमाचल में दूध उत्पादन की ज्यादा संभावनाएं हैं।

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